उन्होंने कहा मुख्य सचिव पढ़े लिखे इंसान हैं, उन्हें कानून की पूरी जानकारी है कि अपने साथ कोई आपराधिक घटना होने के बाद पीसीआर कॉल की जाती है। इतना ही नहीं पुलिस ने मामले में 13 घंटे देरी से एफआईआर दर्ज की और 20 घंटे देरी से मेडिकल कराया है। मुख्य सचिव ने सिर में मुक्के मारने का आरोप लगाया है जबकि मेडिकल में होंठ पर चोट बताई गई है।
इससे पहले शुक्रवार को तीस हजारी कोर्ट ने मामले में पुलिस की रिमांड व विधायकों की जमानत याचिका दोनों खारिज कर दी थी। मेट्रोपोलिटन मैजिट्रेट शैफाली बरनाला टंडन ने विधायकों की दलीलों पर असंतोष जताया था। जज ने कहा था कि फिलहाल केस की जांच आरंभिक स्थिति पर है ऐसे में अभी जमानत नहीं दी जा सकती।
मालूम हो कि मुख्यमंत्री के सलाहकार वीके जैन अपने धारा 164 के तहत दिए बयानों में बताया है की उन्होंने सीएम व डिप्टी सीएम की मौजूदगी में दोनों विधायकों को सीएस की पिटाई करते देखा था। वहीं विधायकों ने जमानत मांगते हुए तर्क दिया था कि जैन ने पुलिस के दबाव में बयान दिए हैं, पुलिस की कहानी झूठी है।