नोटबंदी के बाद जिस तरह का हाल व्यापारी व ग्राहकों का हुआ था ठीक इसी तरह इनदिनों बाजार व उपभोक्ताओं का हुआ है। नोटबंदी के दौरान जैसे बाजार सूना पड़ा था और आवश्यकतानुसार वस्तुएं ही उपभोक्ता खरीदते थे ठीक इसी तरह इन दिनों का भी हाल है।
थोक बाजार तो छुट्टी वाले दिन बंद रहे, लेकिन खुदरा बाजार में भी छुट्टी वाले दिन रौनक नहीं रही। जीएसटी की पहेली ना तो व्यापारी समझ पा रहे है और ना ही आम आदमी।
बड़े व्यापारी जहां अपने-अपने कम्प्यूटर का सॉफ्टवेयर अपडेट करने में जुटे है वहीं गली-मुहल्ले के दुकानदार पुराने तरीके से ही काम करते दिखें। रविवार को मॉल, रेस्टोरेंट और सिनेमा घरों में भी कुछ खास रौनक नहीं देखने को मिली।
शालिमार बाग स्थित मॉल में दिन के वक्त ज्यादातर दुकानों पर भीड़ कम रही। खरीदार छोटी-मोटी आवश्यकताओं की चीज ही खरीदते दिखें। हालांकि शाम के वक्त यहां भीड़ जुटी, लेकिन लोग सिर्फ मॉल में घूमने के लिहाज से बच्चों के साथ पनुंचे थे।
यहीं स्थिति पुरानी दिल्ली स्थितश् सिनेमा हॉल की रही। जीएसटी लागू होने के पूर्व जिस तरह का माहौल, भीड़ वीकेंड पर उमड़ती थी वैसा कुछ देखने को नहीं मिला।
अगले सप्ताह ही दिखेंगा जीएसटी का इंपैक्ट
व्यापारियों का कहना है कि अभी तो परंपरागत तरीके से ही उपभोक्ताओं को माल दिया जा रहा है, लेकिन एक सप्ताह बाद सबकुछ स्पष्ट हो जाएगा। पक्का बिल बनाने के लिए व्यापारी बिल बुक छपवाने के साथ ही अपने-अपने कंम्प्यूटर के सॉफटवेयर बदलने में जुटे है। दूसरी तरफ व्यापारी यह भी मान रहे है कि खरीदारी किसी भी महीने के दूसरे सप्ताह में ज्यातादर शुरू होती है, क्योंकि प्राइवेट सर्विस क्लास के लोगों सैलरी मिलने के बाद ही खरीदारी के लिए निकलते है।
उधारी का काम अब होगा खत्म
व्यापारियों का कहना है कि अब उधारी का काम कम हो जाएगा। पहले तीन महीने में एक बार टैक्स भरना होता था, लेकिन अब हर महीने टैक्स देना पड़ेगा। ऐसे में कोई भी व्यापारी छह महीने से ज्यादा की उधारी नहीं देगा। ऐसे में पहले की तरह फ्रिज, टीवी, वाशिंग मशीन, मोबाइल, सोने का गहना समेत अन्य सामान व्यापारियों से अच्छा रिश्ता होने के बावजूद ग्राहक नहीं ले पाएंगे।
रेलवे मांग रहा है पक्का बिल
जीएसटी को लेकर रेलवे सख्त हो गया है। व्यापारियों का कहना है कि सामान को एक जगह से दूसरे जगह भेजना पहले आसान था। लेकिन अब रेलवे पक्का बिल मांगने लगा है। चुंकि जीएसटी को लेकर व्यापारी अभी तैयार ही नहीं हुए है लिहाजा सामान को एक जगह से दूसरे जगह भेजने का काम भी ठप हो गया है। 5-10 प्रतिशत ही पक्का वाला काम शुरू हो पाया है।
व्यापारी अभी जीएसटी समझने में लगे है। चार्टर एकाउंटेंट से समझ रहे जीएसटी की बारिकियों को। माल मंगाने व भेजने में अभी कठिनाई हो रही है, क्योंकि ट्रांस्पोर्टर भी पक्का बिल मांग रहे है। एक सप्ताह बाद ही स्थिति खुल कर सामने आएगी। -अध्यक्ष दिल्ली व्यापार महासंघ देवराज बावेजा
व्यापारी अगले 10 दिनों में प्रैक्टिस में आ जाएंगे। इनदिनों व्यापारी अपने-अपने एसोसिएशन केअध्यक्ष, सीए से समझ रहे है। नोट बंदी की तरह जीएसटी लागू होने से अफरा-तफरी की स्थिति नहीं मची। 7 जुलाई को देशभर के व्यापारी दिल्ली में एक प्लेटफार्म पर जुटेंगे और स्थिति की समीक्षा करेंगे। बैठक के फीडबैक के आधार पर ज्ञापन तैयार कर केंद्र सरकार को अवगत किया जाएगा।- महामंत्री कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स एसोसिएशन प्रवीण खंडेलवाल
जीएसटी लागू होने के बाद माहौल बंद जैसा ही है। व्यापारियों में उथल-पुथल मचा हुआ है। सरकार को हेल्प डेस्क बनाने की आवश्यकता है। व्यापारी अभी तक बिल बुक नहीं छपवा पाए है। 10 दिनों बाद ही स्थिति ठीक होगी क्योंकि कन्फ्यूजन अधिक है। काजू पर जीएसटी अलग है तो बादाम पर अलग। ऐसे में इसे एक डिब्बे में पैक करने पर कितना जीएसटी लगेगा, यह किसी व्यापारी को नहीं पता है।- कनवीनर चैबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री हेमंत गुप्ता
हम लोग तो खुदरा व्यापारी है। प्रिंट देखकर माल ग्राहकों को देते है। जीएसटी लागू तो हो गया, लेकिन यह कर समझ से परे है। ग्राहक उधार मांगते है तो अब उन्हें देने में भी डर लगता है। पहले तो तीन महीने में टैक्स देना होता था अब हर महीना टैक्स जमा करना कठिन होगा।-खुदरा व्यापारी विजय