आठ नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रात आठ बजे घोषणा कर दी कि रात 12 बजे से 1000 और 500 के पुराने नोट चलन से बाहर कर दिए जाएंगे। इसके बाद पूरे देश में ये चर्चा आम हो गई कि सरकार के इस कदम के बाद देश में छिपा काला धन जल्द ही सामने आ जाएगा और देश के विकास को नई गति मिल जाएगी। लेकिन क्या आपको पता है कि जिस काले धन को लेकर पूरे देश में इतनी चिंता व्यक्त की जा रही है उसके एक बड़े हिस्से के निर्माण में हम और आप रोजाना योगदान दे रहे हैं? आइए जानते हैं कुछ ऐसे ही कदमों के बारे में जिनके चलते हम अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में काले धन के निर्माण को अनचाहे ही बढ़ावा देते हैं...
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(1) निजी प्रैक्टिस करने वाले डाक्टर व अस्पताल: डाक्टरों के पास ज्यादातर पैसा कैश में ही आता है कंसलटेंसी फीस के तौर पर ली जाने वाली फीस की रसीद कम ही शहरों में ली जाती है।
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(2) प्राइवेट अस्पताल भी ज्यादातर लेने देन कैश में ही करते हैं जिनकी रशीद प्रायः नहीं दी जाती या जो रशीद दी भी जाती है उसके प्रामाणिकता का कोई भरोसा नहीं होता।
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(3) काला धन के सबसे बड़े जरिए के रूप में मकान मालिकों द्वारा लिए जाने वाला किराया है। काले धन के सबसे बड़े निवेश का ये जरिया बन चुका है। दिल्ली सहित मेट्रोपॉलिटन शहरों सहित मझले शहरों में ज्यादातर किराया कैश में ही लिया जाता है जिसकी कोई लिखा-पढ़ी नहीं होती।
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(4) किराने, सैलून, ढाबे, ईंट भट्टे, फल,सब्जी, मिठाई की दुकान सहित हार्डवेयर और आम दुकानों पर भी लेन देन कैश में ही होता है साथ ही लिए गए सामान के साथ बारगेन होने के साथ असल राशि कितनी ली गई इसका भी पता नहीं चल पाता।
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(5) देश में भिखारियों की बड़ी संख्या है जिनके पास रोज कैश का अच्छा खासा लेन-देन होता है इसकी भी कोई जानकारी लिखित में नहीं होती।
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(6) देश भर में वकीलों की बड़ी संख्या है जो छोटे कस्बों से लेकर शहरों तक में फैले होते हैं। इनके द्वारा आम लोगों के राजकीय काम कराए जाते हैं जिसके लिए अक्सर कैश में ही पैसा लिया जाता है। अक्सर इनका भी कोई रिकॉर्ड नहीं होता।
(7) स्थानीय स्तर पर काम जमीन की दलाली से लेकर मकान दिलाने तक का काम करने वाले दलाल लोगों से सुविधा शुल्क के नाम पर लोगों से जो पैसा लेते हैं उसकी लिखित पर्ची या रसीद नहीं दी जाती।