100 करोड़ का सीएनजी कमर्शियल व्हीकल की कागजों में फिटनेस दिखाने का घोटाला था। कमर्शियल वाहनों का हर साल फिटनेस टेस्ट होता है।
तत्कालीन दिल्ली सरकार ने इस फिटनेस टेस्ट के लिए एक ऐसी प्राइवेट कंपनी को इसका ठेका दे दिया था जो फर्जी सर्टिफिकेट जारी करती थी। आरोप था कि उस कंपनी के पास फिटनेस टेस्ट की मशीन भी नहीं थी।
तत्कालीन सरकार ने उस कंपनी पर मेहरबानी कर बुराड़ी में जमीन भी दी और फिटनेस टेस्ट की जो भी फीस होती थी उसी के जेब में जाती था।
भाजपा के आरटीआई कार्यकर्ता विवेक गर्ग ने 2012 में आरटीआई के माध्यम सभी डिटेल निकाली और कोर्ट में शिकायत दर्ज की गई। उनका कहना है कि सिर्फ कागजों में ही फर्जी टेस्ट सीएनजी का होता था।