फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कम उम्र में भी हो सकता है घुटने का रिप्लेसमेंट, उपचार नाकाम होने पर प्रतिस्थापन ही कारगर 

Sat, 16 Nov 2019 09:04 PM IST
Avdhesh Kumar अमर उजाला ब्यूरो, नोएडा
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर
विज्ञापन
घुटने का प्रतिस्थापन (नी रिप्लेसमेंट) बेहद महत्वपूर्ण ऑपरेशनों में से एक है। इसके लिए बहुत सावधानी बरतने की जरूरत होती है, क्योंकि जब सभी उपचार नाकाम हो जाता है, तब रिप्लेसमेंट ही एकमात्र कारगर उपचार बचता है। एक समय यह मान्यता थी कि घुटनों की समस्या 60-70 साल के बाद होती है, तब इस ऑपरेशन की आवश्यकता पड़ती है, लेकिन अब कई मामलों में 30 से 40 की उम्र में भी इसकी जरूरत पड़ जाती है।
विज्ञापन


नी रिप्लेसमेंट एक प्रकार की घुटने की सर्जरी है। इसके तहत खराब जोड़ों को कृत्रिम जोड़ों से बदला जाता है। मूल रूप से इसकी जरूरत अर्थराइटिस के मरीजों को होती है। जिसके कई प्रकार होते हैं। जैसे ऑस्टियोअर्थराइटिस एक प्रकार की गठिया है। इसमें जोड़ों में सूजन हो जाती है जिसकी संभावना बुजुर्गों ज्यादा में होती है। 

वहीं रुमेटाइड ऑर्थराइटिस एक ऐसा विकार है, जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली स्वस्थ कोशिकाओं पर हमला करती हैं। इसकी वजह से पूरे शरीर का संचालन बाधित होता है। जोड़ों में सूजन आ जाती है और दर्द होता है। सही इलाज नहीं मिलने पर हड्डियों और कोशिकाओं को नुकसान होता है। साथ ही घुटने की विकृति (ऐसी स्थिति जिसमें घुटने बहार की ओर निकलने लगते हैं) या घुटने की निष्क्रियता, या चल न पाना। इस स्थिति में नी रिप्लेसमेंट की सलाह दी जाती है।
विज्ञापन


रिप्लेसमेंट सर्जरी दो तरह से की जाती है। एक प्रकार है पूरे घुटने का रिप्लेसमेंट। इसमें घुटने को चीरा लगाकर खोला जाता है और इस तरह से आकार दिया जाता है कि वह कृत्रिम जोड़ों को सही से पकड़ सके। कृत्रिम जोड़ को जांघ की हड्डी के आखिरी छोर पर लगाया जाता है और बोन सीमेंट का इस्तेमाल किया जाता है। 

वहीं, कुछ मामलों में आंशिक घुटने का प्रतिस्थापन भी किया जाता है। इसमें पूरा चीरा लगाने के बजाय छेदकर या बहुत कम चीरकर कृत्रिम अंग को उसकी जगह लगाया जाता है। उसको जगह पर बनाए रखने के लिए बोन सीमेंट से भरा जाता है। स्थिति सही सुनिश्चित होने के बाद चीरे को सिल दिया जाता है।
विज्ञापन

सर्जरी के बाद इन बातों का रखें ख्याल

1. सर्जरी के बाद सामान्य होने में 4 से 6 हफ्ते लग सकते हैं, हालांकि सूजन और दर्द 6 महीने तक रह सकता है। इसलिए सर्जरी होने के बाद मरीज को सीधे सोने की सलाह दी जाती है, या ऐसी पोजिशन में रहने की ताकि घुटना मुड़े नहीं।
2. ऐसा कोई भी काम न करें जिससे घुटने पर जोर पड़े। सीढ़ियां चढ़ने उतरने और बाथरूम में जाते वक्त खास सावधानी बरतें।
3. सर्जरी को संक्रमण से बचाने के लिए साफ-सफाई का खास ख्याल रखें।  
4. सर्जरी के बाद भी घुटने से जुड़ी जटिलताएं बनी रहने की संभावना होती है। जैसे नसों में चोट, एलर्जी, संक्रमण, घुटने के पिछली तरफ तरल इकट्ठा होना, अपनी जगह से घुटने का हिल जाना ऐसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। डॉक्टर की बताई गई थेरेपी और संबंधित व्यायाम नियमित करना चाहिए।
5. घुटने की रिप्लेसमेंट सर्जरी के बाद विटामिन डी युक्त खाद्य पदार्थ जैसे मशरूम, मछली, दूध से बनी चीजों और कैल्शियम युक्त पदार्थों का सेवन करना चाहिए। वहीं गोभी, सोयाबीन, ब्रोकली, प्याज और बंदगोभी आदि से बचना चाहिए।
 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें