किसानों ने बिजवासन से रामलीला मैदान के लिए कूच किया। करीब 26 किमी के सफर में रास्ते भर किसान नारेबाजी करते हुए आगे बढ़ते रहे। देर शाम किसानों का काफिला रामलीला मैदान पहुंचा। बीच रास्ते में वंदेमातरम मार्ग पर समाजसेवी मेधा पाटकर भी यात्रा में शामिल हुई।
रामलीला मैदान में दिखी देश की छटा
देर शाम रामलीला मैदान पहुंचने के बाद 29 नवंबर की शाम को एक सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें पूरे देश की छटा दिखी। अलग-अलग हिस्से आए किसानों ने अपने-अपने इलाके के कार्यक्रम पेश किए।
किसान संगठनों की मांग
किसानों ने सरकार के सामने दो मांगे रखी हैं। किसान संगठनों का कहना है कि संसद का विशेष सत्र बुलाकर बीते दिनों किसान संसद की तरफ से पारित किए गए दो अहम विधेयकों को पास कराए। पहला कानून किसानों को एक बार पूरी तरह से ऋण मुक्त किया जाए। उनके सारे कर्ज माफ हों। वहीं, दूसरा कृषि उपज का उचित और लाभकारी मूल्य से जुड़ा है। इसमें किसानों की आय फसल की लागत का डेढ़ गुना करने का प्रावधान है।
तमिलनाडु से दिल्ली पहुंचे किसानों का कहना है कि शुक्रवार को संसद मार्च में सरकार खलल डालने की कोशिश न करे। अगर पुलिस ने किसानों को रोकने की कोशिश तो वह नग्न होकर मार्च करेंगे। किसानों का यह समूह आत्महत्या कर चुके अपने साथी किसानों की खोपड़ी लेकर आया है। इनके नेता पी. अय्याकन्नू ने कहा कि दक्षिण भारतीय नदी जोड़ कृषक संगठन के करीब 1200 किसान रामलीला मैदान में हैं। इससे पहले भी किसानों का यह संगठन दिल्ली के जंतर मंतर पर अजब-गजब तरीकों से प्रदर्शन कर चुका है।
किसान संगठनों ने सभी दलों को भेजा पत्र
स्वराज इंडिया के प्रवक्ता अनुपम ने कहा कि दो मांगों से जुड़ा एक पत्र प्रधानमंत्री समेत सभी राजनीतिक दलों को भेजा है। जो-जो दल किसानों की आय को डेढ़ गुना करने व पूर्ण कर्जमाफी से राजी हैं, वह संसद मार्च में शामिल होंगे। शुक्रवार सुबह किसान नेता अपनी बात रखेंगे, जबकि दूसरा सत्र राजनीतिक दलों के नाम होगा। दूसरी ओर, योगेंद्र यादव ने पुलिस से अपील की कि किसान शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात कहने दिल्ली पहुंचे हैं। पुलिस ने बृहस्पतिवार के मार्च में सहयोग किया, इसी तरह आगे भी सहयोग करें।