किसान मार्च में शामिल हुए विभिन्न दलों के नेता
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यह है किसानों की मांग
सरकार संसद का विशेष सत्र बुलाकर बीते दिनों किसान संसद की तरफ से पारित दो अहम विधेयकों को पास कराए। पहला कानून किसानों को एक बार में पूरी तरह से ऋण मुक्त किया जाए। दूसरा कृषि उपज का उचित और लाभकारी मूल्य से जुड़ा है। इसमें किसानों की आय फसल की लागत का डेढ़ गुना करने का प्रावधान है।
किसानों का मार्च इस वक्त बाराखंबा के पास पहुंच चुका है जो जंतर-मंतर से काफी पास है। वे पूर्ण कर्ज माफी के साथ फसल की लागत का डेढ़ गुना मुनाफा दिलाने के लिए आवाज बुलंद करेंगे। उधर दिल्ली पुलिस ने किसानों को लुटियन की नई दिल्ली में आने की अनुमति नहीं दी थी लेकिन खबर है कि बाद में इसे लेकर सहमति बन गई है। अब किसान नई दिल्ली में प्रवेश कर सकते हैं।
बाराखंभा से आगे बढ़ता हुआ किसानों का मार्च अब संसद मार्ग पहुंच गया है।
किसानों ने अपना मार्च संसद मार्ग पर रोक लिया है। अब किसान वहां रुककर अपनी मांगों के लिए लगातार आवाज उठाते हुए तरह-तरह के नारे लगा रहे हैं। इसके साथ ही किसान नेता लोगों को संबोधित कर रहे हैं। इस बीच वह पारंपरिक प्रस्तुतियां दे रहे हैं।
किसानोें के मार्च में शामिल होने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भी संसद मार्ग पहुंच चुके हैं।
राहुल ने कहा उद्योगपतियों का कर्ज माफ किया किसानों का भी करना होगा
राहुल गांधी ने मंच से कहा कि पिछले साढ़े चार साल में नरेंद्र मोदी सरकार ने 15 लोगों का साढ़े तीन लाख करोड़ का कर्ज माफ किया है। अगर 15 उद्योगपतियों का कर्जा माफ किया जा सकता है तो किसानों का कर्ज भी माफ किया जा सकता है। पीएम ने कहा था सही दाम दिलवाएंगे, एमएसपी बढ़ेगी। आज हालत क्या है आज अंबानी के जेब में पैसा जाता है। हिंदुस्तान को बांट रखा है कहीं अंबानी को, कहीं अदानी को। किसान मोदी जी से अनिल अंबानी के जहाज का पैसा नहीं मांग रहा है। हमारी विचार धारा अलग हो सकती है लेकिन किसानों और युवाओं के भविष्य के लिए हम सब एक होकर खड़े हैं। हम पीएम और बीजेपी से कहना चाहते हैं कि हम पीछे नहीं हटने वाले हैं।
राहुल गांधी ने कहा कि हिंदुस्तान की सरकार किसानों और युवाओं का काम जब तक नहीं करेगी तब तक कुछ नहीं होगा। कोई सरकार किसान और युवाओं का अपमान करेगी तो उसे भी हटा दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि कानून बदलना पड़े, पीएम बदलना पड़े, सीएम बदलना पड़े, कानून बनाने पड़े तो किसानों के लिए बदल डालिए।
राहुल के बाद केजरीवाल भी दहाड़े
राहुल के बाद दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल मंच पर पहुंचे और पीएम मोदी को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि पीएम ने किसानों की पीठ में छुरा घोंपा है। उन्होंने कहा कि सरकार स्वामीनाथन रिपोर्ट लागू क्यों नहीं करती जो किसानों के हक में है। किसान जवान दोनों ही पीएम मोदी से दुखी हैं।
केजरीवाल ने आगे कहा कि पीएम मोदी ने जो बीमा के नाम पर योजना चलाई है वो फसल बीमा योजना नहीं किसान डाका योजना है। किसी सरकार ने 70 साल में इतना मुआवजा नहीं दिया जितना दिल्ली सरकार ने दिया है।
केजरीवाल ने अपने संबोधन में कहा कि मुख्य रूप से किसानों की तीन मांगें हैं। पहला उनका पूरा कर्ज माफ किया जाए, दूसरा उन्हें पूरा दाम मिले, तीसरा उन्हें फसल बर्बाद होने पर मुआवजा मिले न कि बीमा के नाम पर उनके साथ खिलवाड़ हो। इसके अलावा केजरीवाल ने स्वामीनाथन रिपोर्ट की सिफारिशें लागू करने की भी बात रखी।
किसान मार्च में पहुंचे दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से जब पत्रकारों ने बात की तो वह बोले, 'सारे दिल्लीवाले आज कह रहे हैं कि मोदी जी दिल्ली के लिए हानिकारक हैं, दिल्लीवालों से पूछकर देखो। वो दिल्ली के हर काम में टांग अड़ाते हैं।'
इस मौके पर सिर्फ राहुल गांधी और केजरीवाल ही नहीं कई अन्य दलों के दिग्गज नेता जैसे सीताराम येचुरी, फारुख अब्दुल्ला, शरद पवार और अन्य नेता भी मौजूद रहे। इन सभी नेताओं ने किसानों की मांगों से सहमति जताते हुए केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ एकजुटता दिखाई।
सीताराम येचुरी ने कहा कि 2019 का चुनाव धर्मयुद्ध है। जो कौरवों और पांडवों के बीच होगा। उन्होंने बिना किसी का नाम लिए हुए तंज कसते हुए कहा कि कौरवों के सौ भाई थे, लेकिन दो ही के नाम प्रचलित हैं। उन्होंने मंच पर इकट्ठा हुए विपक्षी पार्टियों की ओर इशारा करते हुए कहा कि हम पांच पांडव मिलकर उन्हें 2019 में हराएंगे।