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आज खत्म होगा बेदी की दावेदारी पर सस्पेंस

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पूर्व आईपीएस अधिकारी किरण बेदी को पहले ही पार्टी का चेहरा बना चुकी भाजपा सोमवार को उनकी भावी भूमिका के संबंध में जारी सस्पेंस को खत्म कर देगी।
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दरअसल, सोमवार को ही पार्टी के संसदीय बोर्ड और केंद्रीय चुनाव समिति (सीईसी) की बैठक होनी है। संसदीय बोर्ड की बैठक में जहां बेदी को मुख्यमंत्री पद का परोक्ष या प्रत्यक्ष उम्मीदवार बनाने पर अंतिम फैसला होगा।

वहीं उम्मीदवारों के चयन को लेकर हो रही सीईसी की बैठक में यह साफ हो जाएगा कि किरण बेदी आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल के खिलाफ चुनाव लड़ेंगी या नहीं।
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माना जा रहा है कि भाजपा दिल्ली विधानसभा चुनाव को किरण बनाम केजरीवाल बनाने के लिए किरण बेदी को कम से कम कैंपेन कमेटी की कमान जरूर देगी।

राजनाथ ने दिया संकेत

हालांकि, बेदी को सीएम पद का उम्मीदवार नहीं घोषित किए जाने का गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने साफ इशारा कर दिया है। एक साक्षात्कार में इस आशय का इशारा करते हुए गृह मंत्री ने कहा है कि इस बारे में अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है। इस संबंध में  संसदीय बोर्ड की बैठक में अंतिम फैसला होगा।

उल्लेखनीय है कि चुनाव को किरण बनाम केजरीवाल बनाने की अपनी इस रणनीति के तहत पार्टी पहले ही पीएम नरेंद्र मोदी की रैलियों की संख्या चार तक सीमित करने का फैसला कर चुकी है। पहले भाजपा की योजना पीएम की कम से कम 10 रैलियां कराने की थी।

हालांकि माना जा रहा है कि पार्टी में आपसी खींचतान रोकने के लिए पार्टी नेतृत्व फिलहाल बेदी को सीएम उम्मीदवार घोषित करने से बच सकता है।

ऐसे में उन्हें सीधे सीएम पद का उम्मीदवार घोषित करने के बदले कैंपेन कमेटी की कमान देकर मतदाताओं को स्पष्ट संदेश दिया जा सकता है। वैसे भी पार्टी नेतृत्व बेदी के साथ सांसदों और पार्षदों की बैठक कराकर लगातार इस आशय का सियासी संदेश दे रहा है।
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स्थानीय नेताओं की नाराजगी दूर करने की हो रही कोशिश

बेदी को अचानक चुनावी चेहरा बनाने से स्थानीय नेताओं में फैली नाराजगी को भी दूर करने की कोशिशें शुरू हो चुकी हैं। माना जा रहा है कि गृह मंत्री राजनाथ सिंह का बेदी को सीएम उम्मीदवार न बनाने का इशारा नाराजगी थामने की ही कवायद है।

इसके अलावा स्थानीय नेताओं की नाराजगी से होने वाले सियासी नुकसान को थामने के लिए खुद पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने कमान संभाल ली है। शाह न सिर्फ तैयारियों का जायजा ले रहे हैं, बल्कि स्थानीय नेताओं पर निगहबानी के लिए वरिष्ठ केंद्रीय नेताओं का भी सहारा ले रहे हैं।
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