बृज बेदी की जुबान पर किरण बेदी के लिए दुआएं हैं। दिल्ली विधानसभा चुनावों का फैसला 10 फरवरी को होगा, लेकिन उन्होंने मान लिया है कि किरण बेदी दिल्ली की बेहतरीन मुख्यमंत्री साबित होंगी, ऐसी मुख्यमंत्री जिसे दिल्ली ने आज तक नहीं देखा।
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दिल्ली के सियासी सर्कस में रोजाना नए नाम और चेहरे उभर रहे हैं। शायद अब आप यह सोचें कि ये बृज बेदी कौन हैं और इन्हें किरण बेदी की तारीफों के पुल बांधने की जरूरत क्यों पड़ गई? दरअसल बृज बेदी, किरण बेदी के पति हैं। दोनों का विवाह 43 साल पहले हुआ था। हालांकि पिछले कई वषों से वे अलग-अलग रहते हैं। किरण दिल्ली में रहती हैं और बृज अमृतसर में।
किरण को भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाए जाने के मसले पर उन्होंने भी अपनी राय रखी है। उन्होंने कहा है कि किरण बुद्घिमान और ऊर्जावान हैं, और दिल्ली की सबसे अच्छी मुख्यमंत्री साबित होंगी।
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राजनीति में आने के किरण के फैसले को सराहा
एक अंग्रेजी वेबसाइट से बातचीत में बृज ने कहा कि किरण ने राजनीति में आने का फैसला एकाएक लिया, शायद नियति ने ये पहले से तय कर रखा था। बृज बेदी ने बताया कि किरण बेदी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से प्रभावित थीं। लेकिन मुझे ये नहीं पता की भाजपा की किरण से क्या अपेक्षा है? उसका पुराना रिकॉर्ड शानदार रहा है। मुख्यमंत्री के रूप में भी ये शानदार रहेगा।
बृज बेदी ने कहा कि किरण मुख्यमंत्री के रूप में ईमानदारी से काम करेंगी और वह देश के राजनीतिक हालात में तब्दीली भी लाएंगी। किरण बेदी से उम्र में आठ साल बड़े बृज बेदी अमृतसर में बच्चों के लिए स्कूल चलाते हैं। वह किरण जैसा चर्चित नाम नहीं हैं लेकिन सामाजिक गतिविधियों में बहुत ही सक्रिय हैं।
किरण का राजनीति में आना ठीक है या गलत? जब ये सवाल उनसे पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वह राजनीति में आ चुकी हैं और अब एक बहादुर सैनिक की तरह लड़ेंगी। मेरी दुआएं उनके साथ हैं।
बृज के सामाजिक कार्यों का व्यापक दायरा
बृज का कहना है कि मैं किरण के लिए फिल्ड में प्रचार नहीं कर सकता, लेकिन सोशल मीडिया में जरूर कैंपेन करूंगा। क्या बृज बेदी किसी राजनीतिक दल का समर्थन करते हैं? इस सवाल के जवाब में पर उन्होंने कहा कि मैंने हमेशा उस राजनीति का समर्थन किया, जो समाज में बदलाव लाए। लेकिन आज की राजनीति ऐसी नहीं है, इसलिए मैं इससे दूर ही हूं।
बृज बेदी किरण बेदी जैसे चर्चित नहीं हैं, लेकिन उनके सामाजिक कार्यों का भी व्यापक दायरा है। वे अमृतसर में अश्लील पोस्टरों के खिलाफ अभियान चला चुके हैं। शहर की सफाई, पेंटिंग्स के संरक्षण, ट्रैफिक आदि के लिए भी उन्होंने कई अभियान चलाया हैं।
वह स्टूडेंट्स के स्कॉलरशिप्स की योजनाएं भी चला चुके हैं। ड्रग एडिक्ट बच्चों के लिए स्कूल भी चलाया है। उन्होंने खेल के विकास के लिए भी काम किया है। उन्हें फोटोग्राफी का भी शौक है।
किरण की सफलता में बृज बेदी का हाथ
बृज बेदी और किरण बेदी ने पारंपरिक तरीके से शादी नहीं की है। उन्होंने प्रेम विवाह किया है। किरण बेदी देश की पहली महिला आईपीएस रही हैं। बृज का मानना है कि किरण की सफलता में उनका काफी योगदान है।
बृज ने बताया कि आम तौर पर एक पुरुष की सफलता में महिला का हाथ होता है, लेकिन किरण के मामले में एक महिला की सफलता में पुरुष का हाथ है। बृज ने बताया, 'मैंने किरण को कभी नहीं रोका। हर कदम पर उसका उत्साह बढ़ाया। उसने जब खालसा कॉलेज की लेक्चरर की नौकरी छोड़कर सिविल सर्विसेज की तैयारी का मन बनाया, मैंने उसका साथ दिया।'
बृज ने बताया कि किरण का नाम जब आईएएस की सूची में नहीं आया तो उन्होंने ही उन्हें आईपीएस की ट्रेनिंग के लिए प्रोत्साहित किया। किरण के घर के लोग विरोध कर रहे थे, फिर भी वह मसूरी ट्रेनिंग के लिए गई।
बृज और किरण की मुलकात 1971 में चंडीगढ़ में एक टेनिसकोर्ट में हुई थी। वहां उनका प्रेम फला-फूला, जिसके बाद उन्होंने एक मंदिर में बहुत ही साधारण ढंग से विवाह कर लिया। बृज ने बताया कि टेनिस कोर्ट में हमारी मुलाकात हुई और प्रेम हो गया, लेकिन मेरी शर्त थी की शादी सादगी से होगी। वह तैयार हो गई और हमने मंदिर में शादी कर ली।
बृज ने बताया कि शादी के दो महीने बाद ही किरण आईपीएस की ट्रेनिंग के लिए मसूरी चली गई। किरण आईपीएस बनीं और बृज ने खेती करनीं शुरु कर दीं। उन दिनों का याद करते हुए बृज कहते हैं कि हम दोनों रोजाना एक दूसरे को चिट्ठी लिखते। एक-दो नहीं, पांच चिट्ठियां।
हालांकि वे प्रेमपत्र नहीं होते। उसमे रोजमर्रा के अनुभवों को लिखते, सामजिक और राजनीतिक मसलों पर बात करते। बृज का कहना है कि उन चिट्ठियों की ही देन थी कि किरण सामाजिक कार्यों से जुड़ी। बृज और किरण साथ नहीं रहते, लेकिन बृज हर शुक्रवार किरण से मिलने दिल्ली आते हैं।