किडनी प्रत्यारोपण कराने के बाद फिलहाल ताराचंद सफदरजंग अस्पताल में भर्ती है और स्वास्थ्य लाभ ले रहा है। किडनी प्रत्यारोपण होने के बाद उसका कहना है कि वह इतना गरीब है कि उसने कभी सोचा भी नहीं था कि वह किडनी प्रत्यारोपण करा पाएगा लेकिन बिना किसी खर्च के किडनी प्रत्यारोपण होने से ताराचंद की खुशी का ठिकाना नहीं है।
प्रत्यारोपण करने वाले चिकित्सक का कहना है कि चंडीगढ़ से एक ब्रेन डेड मरीज की दोनों किडनी लाई गई और एक पुरुष और एक दिल्ली की युवती को प्रत्यारोपित किया गया। बिहार के 48 वर्षीय ताराचंद की दोनों किडनी खराब हो चुकी थी न तो कोई किडनी दान करने वाला मिल रहा था और न ही उसके पास इतने पैसे थे कि वह निजी अस्पताल में किडनी प्रत्यारोपण करा पाता।
वह अपनी बीमारी का इलाज सफदरजंग अस्पताल में करा रहा था और किडनी प्रत्यारोपण कराने का इंतजार कर रहा था। वहीं दिल्ली की एक 32 वर्षीय अविवाहित युवती भी किडनी प्रत्यारोपण कराने का इंतजार कर रही थी और डोनर नहीं मिलने की वजह से वह कैडेवर डोनर का इंतजार कर रही थी। दोनों की तलाश सफदरजंग अस्पताल के चिकित्सकों ने पूरी कर दी।