किडनी रैकेट मामले में एक नया खुलासा हुआ है। सरगना टी राजकुमार राव ने लोन चुकाने के लिए खुद अपनी किडनी बेच दी थी। उसके बाद से ही वह इस धंधे में कूद पड़ा था। इसके साथ अपोलो अस्पताल के एक अन्य डॉक्टर के निजी सचिव बृजेश चौहान की भूमिका भी सामने आई है।
बृजेश ने चार किडनी ट्रांसप्लांट कराई थीं। पुलिस को उसके द्वारा कराई गई किडनी ट्रांसप्लांट की फाइलें नहीं मिली हैं। फाइलें मिलने के बाद उसे गिरफ्तार किया जा सकता है। दिल्ली पुलिस ने शनिवार को भी अपोलो अस्पताल में छापेमारी कर काफी फाइलें जब्त की हैं।
दक्षिण-पूर्व जिला पुलिस अधिकारियों के अनुसार निजी सचिव बृजेश चौहान अप्रैल, 2015 से गिरोह के सरगना टी राजकुमार राव के संपर्क में था। दोनों मिलकर किडनी ट्रांसप्लांट कराते थे।