पूरे देश ने देखा कि किस प्रकार से भाजपा की सरकार में सीबीआई अधिकारी आपस में ही लड़ रहे हैं। देश का सबसे शक्तिशाली संसथान टूट के कगार पर खडा हुआ है। देश के बाकी सरकारी संस्थानों का भी यही हाल है।
गृह मंत्रालय ने एक नोटिफिकेशन जारी करके कहा है कि देश की 10 सरकारी संस्थानों को अधिकार दिया गया है कि वो देश के किसी भी नागरिक के कम्प्यूटर्स की कभी भी जांच कर सकते हैं। ऐसा लगता है इस देश को प्रधानमंत्री नहीं बल्कि एक जासूस मिला है, जो देश के हर नागरिक की जासूसी करना चाहता है, हर घर में झांककर देखना चाहता है। ये क़ानून बनाकर भाजपा अपने विरोधी पार्टी के नेताओं पर सिकंजा कसना चाहती है। विरोधी नेताओं की क्या कमजोरियां है, किस तरह से उन्हें ब्लैकमेल किया जा सकता है।
आम आदमी पार्टी का मानना है कि भाजपा द्वारा लागू किया गया ये निर्देश असंवेधानिक है, अलोकतांत्रिक है, और माननीय उच्च न्यायालय द्वारा लोगो के निजिता के अधिकारों को सुरक्षित रखने का जो आदेश है उस पर हथोडा चलाने और माननीय उच्च न्यायालय के आदेशों का अपमान करने का का काम भाजपा ने किया है। आम आदमी पार्टी दोनों सदनों में इसका पुरजोर विरोध करेगी, और सरकार पर ये आदेश वापस लेने का दवाब डालेगी।