खंडपीठ ने यह राय सजा माफी बोर्ड (एसआरबी) की रिपोर्ट आने के बाद जाहिर की थी। इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि शर्मा द्वारा ऐसा अपराध दोबारा किए जाने की संभावना नहीं है। वह समाज के लिए खतरा नहीं है।
कोर्ट ने इस पर गौर करते हुए पूछा था कि फिर उसे अनिश्चित काल के लिए जेल में क्यों रखा जाए। दिल्ली सरकार के स्थायी अधिवक्ता राहुल मेहरा ने कहा कि एसआरबी ने सुशील शर्मा को जल्द न छोड़ने की सिफारिश की थी।
उपराज्यपाल इस सिफारिश को पहले ही स्वीकार कर चुके हैं। दूसरी ओर, विधि विभाग के सचिव ने कहा था कि जल्द रिहाई संबंधी दिशा-निर्देश उन पर बाध्यकारी नहीं हैं और सुशील शर्मा के साथ भेदभाव हुआ है।
याचिका अधिवक्ता अमित साहनी ने दायर की है। इसमें कहा गया है कि सुशील शर्मा का मामला पहली श्रेणी में आता है। वह 29 साल की सजा अब तक काट चुका है। इसमें से परोल व जमानत की अवधि हटा दी जाए तो वह 23 साल व छह माह की सजा काट चुका है।
याचिका में शर्मा ने कहा कि दोषियों को जल्दी रिहा करने संबंधी दिशा-निर्देश के मुताबिक, एक अपराध की सजा काट रहे दोषियों को 20 साल और एक से अधिक अपराध में सजा काट रहे दोषियों को रिहा करने पर 25 साल की अवधि पूरी होने पर विचार किया जाना चाहिए।