दिल्ली में कोरोना संक्रमण से होने वाली मौतों का आंकड़ा शून्य पर लाने के लिए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल जी-जान से जुटे हैं। उन्होंने कहा कि वह प्रत्येक मौत पर स्वयं निगरानी रख रहे हैं। इसके लिए वह डॉक्टरों और विशेषज्ञों से भी सुझाव मांग रहे हैं। दिल्ली सरकार द्वारा कई अहम कदम उठाने का नतीजा है कि रविवार को 64 दिन बाद सबसे कम मौत हुई और संक्रमितों का आंकड़ा भी कम रहा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जून में जब लॉकडाउन खुला था, तब स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर इस बात पर बल दिया गया था कि मौतों को कम करना पहली प्राथमिकता है। जून के मुकाबले जुलाई में कोविड मौतों की संख्या में भारी गिरावट आई। दिल्ली सरकार द्वारा गठित चार समिति 10 अस्पतालों में मौतों के कारण का अध्ययन भी कर रही हैं। 3 अगस्त को यह टीमें विस्तृत रिपोर्ट सीएम को सौंपेंगी।
58 फीसदी कम मौतें
सीएम के मुताबिक, स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट बताती है कि 1 से 12 जून की अपेक्षा 1 से 12 जुलाई की अवधि में कोविड मौतों में 44 प्रतिशत की गिरावट आई। 1 से 12 जून के बीच 1089 मरीजों की मौत हुई, जबकि 1 से 12 जुलाई के बीच मात्र 605 मौतें हुईं। दिल्ली सरकार के कोविड अस्पतालों में जून की अपेक्षा जुलाई में करीब 58 प्रतिशत की गिरावट आई। जून में दिल्ली सरकार के अस्पतालों में 361 मौतें हुई, जबकि जुलाई में 154 मौतें हुईं। वहीं, सरकारी अस्पतालों की तुलना में निजी कोविड अस्पतालों में जून की अपेक्षा जुलाई में 25 प्रतिशत की गिरावट देखी गई और केंद्र सरकार के अस्पतालों में 55 प्रतिशत की गिरावट आई।
मृत्युदर में गिरावट
केंद्र सरकार के आरएमएल अस्पताल में जून में मृत्युदर 81 प्रतिशत थी, जो जुलाई में घटकर 58 प्रतिशत हो गई। सफदरजंग अस्पताल में जून में मृत्युदर 40 प्रतिशत से घटकर जुलाई में 31 प्रतिशत हो गई। दिल्ली सरकार के एलएनजेपी अस्पताल में जून की शुरुआत में मृत्युदर 28 प्रतिशत थी, जो जुलाई की शुरुआत में घटकर 16 प्रतिशत हो गई। राजीव गांधी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में जून की शुरुआत में मृत्युदर 6 प्रतिशत और जुलाई की शुरुआत में 7 प्रतिशत रही।
गंभीर हालत में भर्ती हुए ज्यादातर मरीज
जून की शुरुआत में अधिकतर लोग गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती हुए थे और उनमें से कुछ की 4 दिनों के अंदर मौत हो गई, जबकि कुछ का निधन 24 घंटे के अंदर ही हो गया। 1 से 12 जून तक कुल मौतों का प्रतिशत पिछले चार दिनों में भर्ती हुए कुल मरीजों का 67 प्रतिशत था, जबकि अस्पताल में भर्ती होने के 24 घंटे के अंदर होने वाली मौतों का प्रतिशत 34 था। जून की तुलना में, 1 से 12 जुलाई के बीच अस्पताल में भर्ती होने के 4 दिनों के अंदर केवल 35 प्रतिशत मौतें हुई, जबकि भर्ती होने के 24 घंटे के अंदर 15 प्रतिशत मौतें हुई थीं।
रोजाना देखते हैं स्टेटस रिपोर्ट : जैन
स्वास्थ्य मंत्री सत्येन्द्र जैन का कहना है कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल शुरू से ही व्यक्तिगत रूप से कोविड के गंभीर मरीजों और कोविड मौतों के स्टेटस की प्रतिदिन निगरानी करते हैं। उनके द्वारा मौतों को रोकने के लिए महत्वपूर्ण उपायों को समय पर लागू करने पर बल दिया गया। अब वह कोरोना से मौत को शून्य पर लाने के काम में जुटे हैं।
इन पांच कदमों की रही अहम भूमिका
1. बड़े पैमाने पर जांच : दिल्ली सरकार ने जुलाई के शुरू में जांच का दायरा बढ़ाते हुए 20 से 21 हजार टेस्ट प्रतिदिन कर दिया, जबकि पहले औसतन 5500 टेस्ट था।
2. ऑक्सीपल्स मीटर : सरकार ने होम आइसोलेशन में इलाज करा रहे सभी मरीजों को ऑक्सीमीटर वितरित किया, ताकि मरीज अपना ऑक्सीजन स्तर मापते रहें। इसके लिए 59,600 ऑक्सीपल्स मीटर खरीदे गए।
3. एंबुलेंस सिस्टम : मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री ने लॉकडाउन की शुरुआत में ही बड़ी संख्या में एंबुलेंस बढ़ाने के आदेश दिए थे। इसके बाद एंबुलेंस की संख्या 134 से बढ़ा कर 602 कर दी गई। रेस्पांस टाइम 55 मिनट से घटकर 20-30 मिनट रह गया।
4. बेड और कोरोना एप : मई की शुरुआत में कोविड बेड की क्षमता 3700 थी, जिसे जुलाई के अंत में बढ़ाकर 15 हजार से अधिक कर दिया गया है। वहीं, कोरोना एप लांच होने के बाद गंभीर मरीजों को अस्पताल में उपलब्ध बेड का पता लगाने में सहूलियत हुई।
5. आईसीयू बेड : सीएम केजरीवाल ने आईसीयू बेड के विस्तार पर बल दिया। जून की शुरुआत में 500 से कम आईसीयू बेड थे। अब 2200 से अधिक आईसीयू बेड हैं।