ऐसा भी नहीं है कि इस दौरान सरकार ने जरूरी खर्च में कटौती की है। सरकार ने इस वर्ष परिवहन क्षेत्र के लिए आवंटन में सबसे ज्यादा 38 फीसदी की बढ़ोतरी की है। इसके बाद शिक्षा का स्थान है, जिसमें 35 फीसदी ज्यादा की बढ़ोतरी की गई।
स्वास्थ्य सेवाओं के लिए भी इस वर्ष आवंटन में 25 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है, जबकि सामाजिक कार्य एवं पोषण मद में तीन फीसदी की बढ़ोतरी की है। ऊर्जा के क्षेत्र में यूं तो महज दो फीसदी की बढ़ोतरी हुई, लेकिन तब भी राज्य सरकार हर ग्राहक को हर महीने 200 यूनिट तक बिजली नि:शुल्क दे रही है।
अभी और जुटायी जा सकती हैं सुविधाएं
पैसे बचाने के बजाय इससे और सुविधाएं जुटायी जा सकती हैं। शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में और बेहतर कार्य किया जा सकता है। अंशकालिक शिक्षकों के स्थान पर पूर्णकालिक शिक्षकों की नियुक्ति की जा सकती है। ढांचागत सुविधाएं बढ़ायी जा सकती हैं।
इस समय नई दिल्ली और दक्षिणी दिल्ली को छोड़ दें तो अन्य इलाकों में ढांचागत सुविधाएं उतनी अच्छी नहीं हैं। अविकसित इलाकों में साफ-सफाई पर ज्यादा ध्यान दिया जा सकता है। नि:शुल्क बिजली और पानी की योजना का दायरा बढ़ाया जा सकता है।