दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर कोविड-19 संक्रमण से निबटने के उपायों में फेल होने का राजनीतिक दबाव बढ़ने लगा है। उपराज्यपाल अनिल बैजल ने भी दिल्ली कैबिनेट से मंजूर मुख्यमंत्री के आदेश को भी पलट दिया है।
पी .चिदंबरम ने सवाल उठाते हुए पूछा है कि मिस्टर केजरीवाल बताएं, दिल्लीवासी हैं कौन? आयकर विभाग के पूर्व अधिकारी धनेश कपूर का कहना है कि दिल्ली सरकार का यह आदेश ही गलत है।
दिल्ली सरकार के स्वास्थ्यमंत्री सत्येन्द्र जैन ने आशंका जाहिर की है कि दो सप्ताह के भीतर दिल्ली में कोविड-19 संक्रमितों का आंकड़ा 56 हजार तक पहुंच सकता है।
सत्येन्द्र जैन का यह बयान आठ जून को आया है। जबकि आठ जून से ही दिल्ली समेत देश के लगभग राज्यों में मंदिर, मस्जिद, गिरजाघर समेत तमाम संस्थान, हेयर ड्रेसर की दुकान आदि खुल चुकी हैं।
दिल्ली स्वास्थ्य निदेशालय के एक अधिकारी ने कहा कि अब तो लॉकडाउन रहा नहीं, इसलिए मामले तेजी से बढ़ेंगे। सूत्र का कहना है कि कोविड-19 का परीक्षण भी ज्यादा हो रहा है, इसलिए मामले तेजी से जानकारी में आ रहे हैं।
हालांकि जांच, अस्पताल में व्यवस्था, बेड की उपलब्धता पर सूत्र का कहना है कि दिल्ली सरकार इसके लिए तत्पर है। तेजी से उपाय किए जा रहे हैं।
स्वास्थ्य निदेशालय के अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि दिल्ली में जुलाई, अगस्त का महीना कोविड-19 के संक्रमण का पीक हो सकता है।
जुलाई में दिल्ली में संक्रमितों की संख्या डेढ़ लाख तक हो सकती है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अजय माकन का कहना है कि दिल्ली सरकार के दावों की पोल खुल गई। लोग अस्पतालों में इलाज और जांच के लिए भटक रहे हैं।
कांग्रेस नेता का कहना है कि कुछ दिन पहले केजरीवाल कोविड-19 संक्रमण से चार कदम आगे चलने का दावा कर रहे थे। आज अचानक उन्हें इस तरह सरेंडर करने की नौबत क्यों आ गई?
कांग्रेस नेता राजेश लिलोठिया इसे दिल्ली सरकार का जनता को भ्रम में रखने का प्रयास बताते हैं। इसके जवाब में आम आदमी पार्टी के वालेंटियर राजेश चौधरी का कहना है कि दिल्ली में उत्तर प्रदेश के नोएडा, गाजियाबाद, बुलंदशहर और यहां तक कि मेरठ तक से लोग आते हैं, इलाज कराते हैं।
इसी तरह से हरियाणा के कई जिले के लोग दिल्ली में इलाज करा रहे हैं। ऐसे में दिल्ली पर उत्तर प्रदेश, हरियाणा समेत कुछ राज्यों के संक्रमितों का बोझ बढ़ रहा है।