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केजरीवाल के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट ने लांघी आखिरी बाधा, दिल्लीवालों को नहीं होगी पानी की कमी

Fri, 26 Jul 2019 08:40 AM IST
पूजा त्रिपाठी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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केजरीवाल और सिसोदिया - फोटो : अमर उजाला
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एनजीटी से हरी झंडी मिलने के साथ ही दिल्ली सरकार की महत्वाकांक्षी जल संचय परियोजना का रास्ता साफ हो गया है। दिल्ली सरकार जमीन की पहचान के लिए फिलहाल किसानों से चर्चा कर रही है।

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इसके बाद डिजाइन आदि चीजें पूरी कर जमीन पर काम शुरू होगा। अधिकारियों ने उम्मीद जताई है कि एक माह में प्रोजेक्ट पूरा हो जाएगा। देश में अपनी तरह के पहले प्रोजेक्ट के तहत पल्ला से वजीराबाद के बीच यमुना नदी की बाढ़ क्षेत्र में छोटे-बड़े गड्ढे बनाकर पानी जमा किया जाना है। इससे भूजल स्तर बढ़ेगा और दिल्ली में पानी की समस्या भी दूर होगी।

करीब डेढ़ माह पहले मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने प्रोजेक्ट की घोषणा की थी। केजरीवाल का वादा था कि बगैर नदी की पारिस्थितिकी से छेड़छाड़ किए बाढ़ क्षेत्र में पानी रोककर भूजल स्तर बढ़ाएंगे। इसके लिए पल्ला से वजीराबाद के बीच की जगह चुनी गई थी।
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इस क्षेत्र में किसानों से किराए पर जमीन लेकर छोटे-बड़े गड्ढे बनाकर यमुना के बाढ़ का पानी इकट्ठा किया जाएगा। केजरीवाल ने दिल्ली को जल संकट से बचाने के लिए इस प्रोजेक्ट को गेम चेंजर बताया था।

इन अथॉरिटी से लेनी थी मंजूरी

एक अधिकारी ने बताया कि प्रोजेक्ट को अलग-अलग एजेसियों से मंजूरी लेनी थी। अपर यमुना रिवर बोर्ड (यूआरवाईबी), केंद्रीय भूजल बोर्ड (सीजीडब्ल्यूबी), राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी), केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी), एनजीटी मॉनिटरिंग कमेटी व एनजीटी प्रिंसिपल कमेटी की मंजूरी मिलने के बाद दिल्ली कैबिनेट ने दो जुलाई को जल बोर्ड के प्रस्ताव पर मुहर लगा दी थी। आखिर में बृहस्पतिवार को एनजीटी कोर्ट भी प्रोजेक्ट पर राजी हो गया है। अब जमीनी स्तर पर काम शुरू होगा।

किसानों से सरकार कर रही बातचीत
दिल्ली सरकार के एक अधिकारी ने बताया कि किसानों से चर्चा करके पहले जमीन का किराया तय किया गया। किसानों को एक एकड़ के लिए हर साल सरकार 77,000 रुपये देगी। फिलहाल जमीन की पहचान के लिए किसानों से बातचीत चल रही है। एक हफ्ते के भीतर यह काम भी पूरा कर लिया जाएगा।

नदी से 10 किमी दूर तक का भूजल बढ़ेगा
दिल्ली सरकार का कहना है कि पल्ला से वजीराबाद के बीच की लंबाई 20 किमी है। जबकि बाढ़ क्षेत्र में तीन किमी की चौड़ाई में गड्ढ़े बनेंगे। भूजल पर इसका असर 8-10 किमी दूर तक रहेगा। इसकी वजह यह है कि यमुना नदी के नजदीक जमीन की आंतरिक भूसंरचना में ढाल दिल्ली की तरफ है। इससे जमीन के नीचे पानी दूर तक फैलेगा। वहीं, बाढ़ क्षेत्र में 40 किमी की गहराई तक रेत की पर्त है। पानी इसमें फंसकर फैलता रहेगा। सरकार का मनाना है कि गड्ढे को बनाने में करीब 50 करोड़ रुपये का खर्च होगा।
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प्रोजेक्ट की प्रगति:

अथॉरिटी           मांगी मंजूरी        मिली मंजूरी
यूआरवाईबी         25/6/19            4/7/19
सीजीडब्ल्यूबी      25/6/2019        6/7/2019
एनएमसीजी        25/6/2019        6/7/2019
सीडब्ल्यूसी         23/5/2019        18/6/2019
एनजीटी
मॉनिटरिंग कमेटी  25/6/2019    12/7/2019
एनजीटी
प्रिंसिपल कमेटी    5/7/2019    19/7/2019
दिल्ली सरकार
की कैबिनेट         2/7/2019    3/7/2019
एनजीटी कोर्ट      23/7/2019        25/7/2019

दिल्लीवालों के लिए खुशखबरी है कि यमुना नदी के बाढ़ क्षेत्र में जल संचय के दिल्ली सरकार के प्रोजेक्ट को एनजीटी व केंद्र सरकार की सभी मंजूरियां मिल गई हैं। इसके लिए दोनों को धन्यवाद। सरकार अब जल्द ही जमीन पर प्रोजेक्ट शुरू कर देगी।-अरविंद केजरीवाल, मुख्यमंत्री, दिल्ली।
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