आम आदमी पार्टी (आप) के आला नेतृत्व पर बेशक पार्टी के बड़े नेताओं ने गंभीर सवाल उठाए हों, लेकिन तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में फैसला किया गया है।
पार्टी ने तय किया है कि दिल्ली विधानसभा चुनाव अरविंद केजरीवाल की अगुवाई में लड़ा जाएगा। हालांकि, विरोध के सुर शांत करने के लिए तय हुआ कि पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक का एक साल के भीतर चुनाव होगा।
बैठक में पार्टी की दशा-दिशा तय करने के लिए उठाए जाने वाले कदमों की जानकारी अरविंद केजरीवाल ने मीडिया को दी।
होगा आप का पुनर्गठन
अरविंद केजरीवाल ने बताया कि मिशन विस्तार के तहत पार्टी की जिले से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक की कमेटियों का पुनर्गठन होगा। इसके लिए पृथ्वी रेड्डी की अगुवाई में एक कमेटी का गठन किया गया है।
कमेटी पार्टी के जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं व नेताओं से बात करेगी। करीब 150 पर्यवेक्षक नियुक्त होंगे, जिनके सहारे गांव, कस्बा, जिला व राज्य स्तर पर पार्टी का ढांचा तैयार किया जाएगा।
इसके बाद राष्ट्रीय समिति व राष्ट्रीय कार्यकारिणी तैयार होगी। पुनर्गठन से पहले 35 सदस्यीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी में करीब दो दर्जन आमंत्रित सदस्यों को शामिल किया गया है।
सालभर के भीतर तय होगा नया ढांचा
नई कार्यकारिणी राजनीतिक मामलों की समिति (पीएसी) के सदस्यों व राष्ट्रीय संयोजक का चुनाव करेगी। पूरा ढांचा एक साल के भीतर तैयार कर लिया जाएगा।
वहीं, मनीष सिसोदिया ने बताया कि दिल्ली विधानसभा में पार्टी का चेहरा अरविंद केजरीवाल ही होंगे। यहां चुनावों का ऐलान कभी भी हो सकता है।
लिहाजा दिल्ली में पार्टी के पुनर्गठन का काम तेजी से होना है। सिसोदिया ने उम्मीद जताई कि तीन माह के भीतर दिल्ली में काम पूरा कर लिया जाएगा।
मुझे थप्पड़ भी मार सकते हैं योगेंद्र
योगेंद्र यादव की तरफ से पार्टी में आ रहे सुप्रीमो कल्चर पर अरविंद केजरीवाल ने कहा, ‘आम आदमी पार्टी एक परिवार है। इसमें कई मसलों पर राय अलग हो सकती है। योगेंद्र ने मेरे बड़े भाई हैं। उन्हें डांटने व थप्पड़ मारने का भी हक है।
मैं भी एक इंसान हूं। गलतियां हो सकती हैं, लेकिन योगेंद्र ने जो भी कमेंट किया है। उसे गंभीरता से लिया जाएगा।’ वहीं, योगेंद्र यादव ने कहा, ‘मैंने केजरीवाल पर नहीं बल्कि संगठन के भीतर घुसते सुप्रीमो कल्चर पर सवाल किया है।
‘आप’ लोकतांत्रिक पार्टी है। सोचिए, अगर बसपा में मायावती, कांग्रेस में राहुल गांधी व भाजपा में नरेंद्र मोदी के खिलाफ आवाज उठाता तो यहां (प्रेस कांफ्रेस) नहीं बैठा होता।’
'मोदी की आंधी चल रही थी'
लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद कई नेताओं ने केजरीवाल के नेतृत्व पर सवाल उठाए थे। शाजिया इल्मी ने तो पार्टी से किनारा भी कर लिया।
वहीं, योगेंद्र यादव ने भी केजरीवाल के नेतृत्व पर तल्ख टिप्पणी करते हुए चिट्ठी लिखकर इस्तीफे की पेशकश की थी। इस पर मनीष सिसोदिया ने यादव पर पलटवार किया। बड़े नेताओं की तू-तू मैं-मैं के बीच शुरू हुई बैठक में पार्टी के पूरी तरह से पुनर्गठन का फैसला लिया गया।
साथ ही केजरी ने कहा कि एक साल पुरानी पार्टी के न सिर्फ चार सांसद चुने गए, बल्कि 1.13 करोड़ लोगों ने वोट भी किया है। वह भी तब, जब एक व्यक्ति की आंधी चल रही थी। पार्टी से लोगों को उम्मीदें हैं।