इंटरनेट से हुई दोस्ती आज दिल्ली की गद्दी तक पहुंच गई है। दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसौदिया एक वेबसाइट के जरिए सीएम अरविंद केजरीवाल के संपर्क में आए थे, जिसके बाद उनकी नजदीकियां बढ़ती गईं।
दोनों ने एनजीओ के जरिए सरकारी विभागों में चल रहे भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम छेड़ दी। सरकारी विभागों में बगैर रिश्वत के परेशान लोगों के काम कराए। भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ रहे ये दोस्त दिल्ली की सत्ता तक पहुंच गए।
बात वर्ष 1999 की है। अरविंद केजरीवाल आयकर विभाग में ज्वाइंट कमिश्नर के पद पर कार्यरत थे। इस दौरान सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार ने उन्हें झकझोर कर रखा दिया।
भ्रष्टाचार से परेशान लोगों की मदद के लिए केजरीवाल ने ‘परिवर्तन’ नाम से एक एनजीओ बनाया। एनजीओ की वेबसाइट भी खुद ही डिजाइन की। अपनी मुहिम से जोड़ने के लिए अरविंद ने इसी वेबसाइट एक प्रश्न डाला।
प्रश्न था कि क्या आप वॉलेंटियर बनना चाहते हैं? इस प्रश्न का पहला जवाब दिया था मनीष सिसौदिया ने। जो पेशे से पत्रकार थे। परिवर्तन के पहले वॉलेंटियर मनीष सिसौदिया थे।
दोनों की मुलाकात हुई और एनजीओ में नंबर-1 और नंबर-2 बनकर सफर शुरू हुआ। एनजीओ के जरिए करीब आठ सौ लोगों की समस्याओं को हल कराया। इस बात को करीब 15 वर्ष गुजर चुके हैं।
आज जब दिल्ली की सरकार बनी, तो अरविंद केजरीवाल ने अपने एनजीओ की तरह ही सरकार में भी मनीष को नंबर-2 यानि डिप्टी सीएम का पद दिया।
तब परिवर्तन के जरिए लोगों की समस्याएं हल कीं, अब पूरी दिल्ली की समस्याओं से निजात दिलाने की ताकत इनके पास है।