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खास खबरः वन्यजीवों को खुश रखकर कम करेंगे मृत्युदर, जीवनशैली की होगी पड़ताल

Sun, 08 Nov 2020 06:11 AM IST
दुष्यंत शर्मा किशन कुमार, नई दिल्ली
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चिड़ियाघर - फोटो : amar ujala
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अब इंसानों की तर्ज पर वन्यजीवों के मानसिक तनाव की पहचान कर उनकी जीवनशैली को बेहतर किया जाएगा। राजधानी के राष्ट्रीय चिड़ियाघर ने इस दिशा में कदम बढ़ाए हैं। चिड़ियाघर प्रबंधन का दावा है कि वन्यजीव खुश रहेंगे तो मृत्युदर भी कम होगी और वह बीमारियों से भी बचे रहेंगे। चिड़ियाघर ने जबलपुर स्थित नानाजी देशमुख वेटरनरी विज्ञान विश्वविद्यालय को इस बाबत पत्र लिखकर सहयोग की मांग की है।

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चिड़ियाघर के निदेशक रमेश कुमार पांडे ने बताया कि काफी समय से वन्यजीवों के मानसिक तनाव को कम करने की दिशा में आवश्यकता महसूस की जा रही थी। इसको देखते हुए प्रशासन ने अपने स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी हैं। चिड़ियाघर प्रशासन ने हाल ही में एक डॉक्टर की भी नियुक्ति की है, जो वन्यजीवों के मानसिक तनाव को कम करने के लिए अध्ययन भी करेंगे। जबलपुर विश्वविद्यालय से मंजूरी मिलने के बाद इस दिशा में प्रयास और तेज हो जाएंगे। उम्मीद है कि आने वाले समय में वन्यजीवों की मृत्युदर को भी कम किया जा सकता है। यहां फिलहाल 1150 वन्यजीव हैं, जबकि पक्षियों की संख्या भी हजारों में है।


हार्मोन के स्तर से चलेगा पता
निदेशक ने बताया कि अध्ययन के तहत वन्यजीवों के हार्मोन से उनके मानसिक तनाव के बारे में पता किया जाएगा। इसके लिए वन्यजीवों के मल की विशेष उपकरण के माध्यम से जांच की जाएगी। क्योंकि, वन्यजीव मल के साथ विभिन्न हार्मोन को भी छोड़ते हैं। इसके लिए प्रत्येक हार्मोन का स्तर जांचा जाएगा। प्रत्येक हार्मोन की एक रेंज तय की गई है। यदि किसी हार्मोन का स्तर उस रेंज से ज्यादा निकलता है तो इससे मानसिक तनाव को जांचने में मदद मिलेगी। विशेषज्ञों के अनुसार, वन्यजीवों में विशेष तौर पर कॉर्टिसोल नाम का हार्मोन तनाव के लिए जिम्मेदार माना जाता है। इस हार्मोन का संबंध तनाव को व्यवस्थित करने के लिए माना जाता है। इसे हाइड्रोकॉर्टिसोन और ग्लूकोकॉर्टिकॉइड्स के नाम से भी जाना जाता है।
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व्यवहार और मृत्युदर पर पड़ता है प्रभाव 
मानसिक तनाव की वजह से वन्यजीवों के व्यवहार और उनकी मृत्युदर पर सीधा प्रभाव पड़ता है। यदि वन्यजीव मानसिक तनाव में रहता है तो उसका आचरण पूरी तरह से बदल जाता है। इस वजह से कई बार उसे खाने में परेशानी, नींद का पूरा न होना, बेचैनी, चिड़चिड़ापन और अधिक गुस्सा भी आ जाता है। कई बार वन्यजीव अधिक प्रतिक्रिया नहीं देते हैं, लेकिन तनाव में रहते हैं। कई बार चिड़ियाघर भी ऐसे वन्यजीवों की पहचान करने में कठिनाई महसूस करता है। तनाव की वजह से वन्यजीवों में विभिन्न प्रकार की बीमारियां होती हैं। यदि बढ़ती उम्र के साथ बीमारियां वन्यजीव को घेर लेती हैं तो इससे उसकी मृत्यु भी हो जाती है। यदि तनाव का समय पर पता लगा लिया जाए तो उनका उपचार कर ठीक किया जा सकता है।

मादा भालू के जीवन में लौटाई खुशहाली
निदेशक ने बताया कि चिड़ियाघर परिसर में लंबे समय से एक मादा भालू को अंधा समझा जा रहा था। वह बाड़े से बाहर तक निकलने में असमर्थ थी। बाड़े के भीतर रहकर भी कहीं न कहीं मानसिक तनाव से ग्रस्त हो गई थी। उसके पूरे शरीर के बाल उड़ गए थे। इसके बाद उसके बाड़े के बाहर विशेष तौर पर लकड़ी का तख्त बनवाया गया। फिर उसे बाहर निकाला गया था तो वह धीरे-धीरे चलने लगी। बाद में पता चला कि वह नजदीक का देख सकती है। अब वह पूरी तरह से स्वस्थ है और बाड़े में प्रतिदिन टहलती है।

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