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हाईकोर्ट ने मीडिया हाउस से कहा, सहानुभूति के लिए दुष्कर्म पीड़िता की पहचान जाहिर न करें

Thu, 26 Apr 2018 11:54 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली
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सहानुभूति पैदा करने के लिए यौन शोषण की पीड़िता का नाम व फोटो सार्वजनिक करने की जरूरत नहीं है। ऐसा करने के दूरगामी परिणाम हो सकते हैं। हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी एक मीडिया हाउस की दलील पर की है। 
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मीडिया हाउस ने कोर्ट द्वारा लगाए गए 10 लाख रुपये जुर्माना अदा करने में असमर्थता जाहिर की, जिसे कोर्ट ने मानने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने दस दिनों के भीतर जुर्माने की राशि देने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने इस मामले में देश के 12 मीडिया घरानों को नोटिस कर जवाब मांगा था और उन पर 10-10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था। 

कार्यवाहक मुख्य न्यायमूर्ति गीता मित्तल व न्यायमूर्ति सी. हरि शंकर ने टिप्पणी उक्त मीडिया हाउस द्वारा माफी मांगे जाने के बाद की। मीडिया हाउस ने आठ वर्षीय पीड़िता व उसके परिजनों की पहचान सार्वजनिक करने पर माफी मांगते हुए जुर्माना अदा करने में असमर्थता जाहिर की। 
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मीडिया हाउस ने कहा कि उसने पीड़िता का नाम व फोटो सहानुभूति पैदा करने के लिए सार्वजनिक की थी। कोर्ट ने मना करने के बाद भी मीडिया हाउस द्वारा अपने एक ब्लॉग में पीड़िता का नाम सार्वजनिक करते हुए लेख छापने पर कड़ी फटकार लगाई। 

मामले में न्याय मित्र वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद निगम ने कोर्ट को बताया कि हिंदी समाचार पत्रों समेत कुछ अन्य मीडिया घरानों ने भी पीड़िता की फोटो व नाम प्रकाशित किया है। कोर्ट ने इन मीडिया घरानों को नोटिस जारी कर 18 मई तक जवाब मांगा है। 

कोर्ट ने कहा कि आईटी एक्ट के तहत सोशल मीडिया प्लेटफार्म गूगल, फेसबुक व याहू पर भी पीड़िता का नाम व फोटो प्रकाशित करने पर दंडनीय कार्रवाई की जा सकती है। कोर्ट ने गूगल व फेसबुक समेत अन्य सोशल मीडिया प्लेटफार्म को भी नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।  
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