सेंट्रल पार्क में प्रर्दशन करते कश्मीर पंडित
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कश्मीर से 29 साल पहले आतंकवादियों द्वारा अत्याचार करके निर्वासित किए गए कश्मीरी पंडितों ने अपनी जमीन पर वापसी की मांग को लेकर राजघाट पर प्रदर्शन किया और कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में निष्कासन का दर्द नामक प्रदर्शनी लगाई। 19 जनवरी को कश्मीरी पंडितों ने काले दिवस के रूप में मनाया।
कश्मीरी पंडितों ने अपनी मांगों को लेकर शनिवार दोपहर राजघाट पर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। कश्मीरी पंडित महिलाएं भी प्रदर्शन में शामिल हुईं। 29 साल पहले कश्मीर से आतंकवादियों द्वारा अत्याचार करके भगाए गए कश्मीरी पंडित परिवारों ने अपने दर्द को बयां किया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल पूछा कि क्या हमें अपने घर वापस जाने का अधिकार नहीं है। उन्होंने सरकार से मांग कि कश्मीरी पंडितों की हत्या मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में करवाई जाए। इस मामले को धर्म का सफाया और नरसंहार के रूप में स्वीकार किया जाए। कश्मीरी पीड़ित परिवारों ने सुप्रीम कोर्ट से भी न्याय की गुहार लगाई। पोस्टरों के साथ उन्होंने अपने दुख को बयां किया। उन्होंने पोस्टर के माध्यम से कहा कि बापू ने हमें सिखाया कि हिंसा न करें, लेकिन उन्होंने यह भी सिखाया कि कभी हार न मानें। हम बापू के मार्ग पर हमेशा चलते रहेंगे और अपने घरों को वापस हासिल करने के लिए लड़ते रहेंगे।
वहीं, दूसरी ओर यूथ फॉर पनुन कश्मीर और कश्मीरी समिति दिल्ली संस्थाओं ने कनाट प्लेस के सेंट्रल पार्क में कश्मीरी पंडितों के खानाबदोश जीवन को दिखाने के लिए निष्कासन का दर्द नामक प्रदर्शनी लगाई। पनुन कश्मीर संस्था के अध्यक्ष राहुल कौल ने बताया कि कश्मीरी पंडितों को कश्मीर में वापस भेजने के लिए सरकार हमेशा वादे करती है, लेकिन अभी तक उनके लिए कोई कदम नहीं उठाया। हम अभी भी खानाबदोशों की तरह जीवन बिता रहे हैं। वहीं, कश्मीरी समिति दिल्ली के अध्यक्ष विजय रैना ने कहा कि यह दिन उनके लिए काला दिन है। इस दिन कश्मीरी पंडितों पर जो अत्याचार हुए उनके घाव आज भी उनके जीवन में दिखते हैं। प्रदर्शनी में पोस्टर, कविताओं, स्केच और पेंटिंग्स के जरिये कश्मीरी पंडितों ने अपना दर्द बयां किया।
कश्मीरी लोगों ने सेंट्रल पार्क में तंबू लगाकर दिखाया कि वे आज भी किस तरह का जीवन बिता रहे हैं। उन्होंने दिल्ली की जनता को बताया कि केंद्र सरकार किस तरह कश्मीरी पंडितों को न्याय दिलाने में उनकी मदद से बच रही है।