न्यायमूर्ति ज्योति सिंह ने यह टिप्पणी तब की, जब करिश्मा कपूर के बच्चों की ओर से पेश वरिष्ठ वकील महेश जेठमलानी ने दावा किया कि करिश्मा की बेटी, जो अमेरिका की एक यूनिवर्सिटी में पढ़ रही है, की दो महीने की फीस का भुगतान नहीं किया गया है। जेठमलानी ने कहा कि वैवाहिक समझौते के तहत संजय कपूर को बच्चों की पढ़ाई और अन्य खर्चों का भुगतान करना था।
वहीं, प्रिया कपूर की ओर से पेश वरिष्ठ वकील ने इस दावे को चुनौती दी और कहा कि बच्चों के सभी खर्चों का भुगतान प्रिया कपूर ने किया है। नायर ने आरोप लगाया कि इस तरह के मुद्दों को कोर्ट में उठाने का मकसद केवल मीडिया में चर्चा में रहना है।
न्यायमूर्ति सिंह ने कहा कि इस तरह के मुद्दे कोर्ट में नहीं आने चाहिए। उन्होंने प्रिया कपूर की ओर से पेश वकील को निर्देश दिया कि इस तरह की समस्याओं का समाधान सुनिश्चित करें। कोर्ट ने कहा, मैं इस पर 30 सेकेंड से ज्यादा समय नहीं देना चाहता। यह सवाल फिर से मेरे कोर्ट में नहीं आना चाहिए। मैं नहीं चाहता कि यह सुनवाई मेलोड्रामाटिक हो।