फतेह सिंह बताते हैं कि उनकी टुकड़ी में शामिल सिपाही उमेद ने दुश्मनों द्वारा बिछाई गई बारूदी सुरंग में अपना हाथ गंवा दिया। लेकिन हमारी टुकड़ी ने सतर्कता बरती और दो घुसपैठियों को मार गिराया, जिसके बाद बाकी बचे दुश्मन पोस्ट छोड़कर भाग खड़े हुए और हमने पहाड़ी पर चार दिन बाद सुबह पांच बजे कब्जा कर लिया। इस दौरान दुश्मनों के एचएमजी, मोर्टार, एके-47 मैगजीन और उनका राशन दाल, चावल, टेंट, ड्रेस इत्यादि को कब्जे में ले लिया गया।
उस समय फतेह सिंह बैटल फील्ड नर्सिंग असिस्टेंट की भूमिका में थे। आक्रमण के साथ साथियों को दवा देकर उनको सुरक्षित ठिकाने पर ले जाने की जिम्मेदारी उनपर थी और साथ ही कवरिंग फायरिंग करते हुए आगे बढ़ रहे थे। क्योंकि वहां बारूदी सुरंगें बिछी हुई थीं। फतेह सिंह मूलत: रेवाड़ी जिले के कोहारण गांव के रहने वाले हैं। मौजूदा समय दिल्ली के सागरपुर में रहते हैं।