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जब 20 दिन की थी तो कारगिल में शहीद हो गए थे पिता, अब बेटी ने बोली ये बड़ी बात

Wed, 25 Jul 2018 04:58 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुरुग्राम
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तावड़ू में रहने वाले नायक अहमद अली 1985 में सेना में भर्ती हुए थे। देश सेवा के कई मेडल हासिल किए और फिर वह दिन भी आ गया, जिसका हर फौजी को इंतजार होता है। पाकिस्तान के हमले के साथ शुरू हुए कारगिल युद्ध में देश के लिए आगे लाइन में खड़ा होकर लड़ाई करते हुए 02 जुलाई 1999 को अपनी शहादत दे दी।

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जब अहमद अली की शहादत की खबर आई तब उनके दो बेटे और पांच बेटी में सबसे छोटी बेटी महज 20 दिन की थी। शहादत के बाद सरकार ने पेट्रोल पंप और मुआवजा राशि दी और बच्चों की पढ़ाई का वादा किया।

परिजनों का कहना है कि बच्चों का वादा अब भी वादा है। अहमद अली के भाई का कहना है दो भतीजे निजी कॉलेज से एमबीबीएस कर रहे हैं। इनकी पढ़ाई के लिए रक्षा मंत्रालय में कई बार अर्जी दी जा चुकी है, लेकिन फीस की राशि नहीं मिली।
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खुद के जुगाड़ और बचत से इनको डॉक्टरी तालीम दिलवाई जा रही है। 20 दिन की उम्र में पिता का साया उठ जाने वाली सहाना अब 12वीं में पढ़ती है। उसका मकसद देश सेवा करना है। सहाना कहती है कि मैंने अपने पिता को नहीं देखा। बहन और भाई पिता के बारे में बताते हैं, लेकिन मुझे फक्र है कि मेरे पिता ने देश के लिए अपनी कुर्बानी दे दी।

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