1966 में हरियाणा गठन के बाद से प्रदेश में चाहे किसी की सरकार रही हो, लेकिन पलवल से हर बार चुनाव में अलग-अलग पार्टियों के ही विधायक चुनाव जीते है।
वर्ष 1967 में हुए पहले विधानसभा चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार धन सिंह ने भारतीय जनसंघ के मूलचंद मंगला को हराया। 1968 में हुए चुनाव में कांग्रेस के रूप लाल मेहता ने स्वतंत्र पार्टी के धन सिंह को पराजित किया।
मेहता के निधन के बाद उपचुनाव हुआ, जिसमें कांग्रेस के कल्याण सिंह ने आर्य सभा के रामानंद को हराकर पहली बार विधान सभा चुनाव जीता।
वर्ष 1972 में हुए चुनाव में आर्य सभा के श्याम लाल तेवतिया ने कांग्रेस के कल्याण सिंह को हराया। वर्ष 1977 में जनता पार्टी के मूल चंद मंगला ने कांग्रेस के कल्याण सिंह को हराया।
वर्ष 1982 में हुए विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के कल्याण सिंह ने निर्दलीय सुभाष कत्याल को हराकर जीत हासिल की। 1987 में लोकदल की टिकट पर चुनाव लड़े सुभाष कत्याल ने कांग्रेस के किशन चंद दीक्षित को हराकर जीत हासिल की।
वर्ष 1991 में हरियाणा विकास पार्टी के करन सिंह दलाल ने कांग्रेस के नित्यानंद शर्मा को हराया और पहली बार विधानसभा पहुंचे। वर्ष 1996 में पलवल में फिर करन सिंह दलाल हरियाणा विकास पार्टी की टिकट पर चुनाव लड़े और बसपा प्रत्याशी सुभाष चौधरी को चुनाव हराकर जीत हासिल की।
वर्ष 2000 में करन सिंह दलाल रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया की टिकट पर चुनाव लड़े और इनेलो के देवेंद्र सिंह चौहान को चुनाव हराकर जीत हासिल की।
चौथी बार फिर करन सिंह दलाल कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़े और इनेलो के सुभाष कत्याल को चुनाव हराकर चौथी बार विधानसभा पहुंचे।
वर्ष 2009 में पांचवीं बार करन सिंह दलाल कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़े लेकिन इनेलो के सुभाष चौधरी ने इस बार करन दलाल को हराकर जीत हासिल की।