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Delhi NCR News: एक-दूसरे के साथी बने कांवड़िये, भोले की भक्ति में मिट गई सफर की थकान

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-शिवभक्ति में लीन श्रद्धालुओं ने कहा-पता ही नहीं चला कब पूरी हो गई यात्रा, कांवड़ियों ने सुनाए आस्था और भरोसे के अनुभव
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संवाद न्यूज एजेंसी

नई दिल्ली।
सावन में भगवा रंग में रंगे रास्तों पर हजारों शिवभक्त कंधों पर कांवड़ उठाए अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहे हैं। इस यात्रा में जहां भगवान शिव के प्रति अटूट विश्वास दिखाई दे रहा है, वहीं कांवड़ियों के बीच एक-दूसरे के लिए मदद और अपनापन भी देखने को मिल रहा है। कांवड़ यात्रा को केवल जल लाने और शिवालय में अर्पित करने की परंपरा मानना शायद इसके पूरे भाव को नहीं समझना है।

यह यात्रा रास्ते में अनजान लोगों को भी एक-दूसरे का साथी बना देती है। थकान हो या परेशानी, रास्ता भटक जाए या किसी को मदद की जरूरत हो, दूसरे कांवड़िये तुरंत आगे बढ़कर सहयोग करते हैं। इसी भरोसे और भाईचारे की कई कहानियां इस बार भी यात्रा के दौरान सामने आ रही हैं। द्वारका निवासी संजय अपने परिवार के साथ हरिद्वार से कांवड़ में जल लेकर वापस लौट रहे थे। यात्रा के दौरान भीड़ अधिक होने के कारण उनकी 16 वर्षीय बेटी अचानक परिवार से बिछड़ गई। कुछ समय तक परिवार ने आसपास उसे तलाश किया। संजय ने बताया कि बेटी के नहीं मिलने से चिंता बढ़ गई, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं छोड़ी।
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भीड़ में बेटी बिछड़ी, भोले पर भरोसा रखा : संजय ने कहा कि उन्होंने भगवान भोलेनाथ पर अपना विश्वास कायम रखा और मन से प्रार्थना की। इसके कुछ घंटों बाद ही एक अन्य कांवड़िये के फोन से उनकी बेटी ने उन्हें कॉल किया। उसने बताया कि वह सुरक्षित है और हरियाणा के रहने वाले कुछ शिवभक्तों के साथ यात्रा कर रही है।
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पता ही नहीं चला कब पूरी हो गई यात्रा : कई कांवड़ियों ने कहा कि लगातार पैदल चलने के बावजूद यात्रा के दौरान उन्हें थकान का अहसास कम हुआ। रास्ते में ‘बोल बम’, ‘हर हर महादेव’ के जयकारों और साथ चल रहे शिवभक्तों के उत्साह ने सफर को आसान बना दिया। हरियाणा की ओर लौट रहे कुछ श्रद्धालुओं ने बताया कि शिवभक्ति में ऐसा मन लगा कि पता ही नहीं चला कब यात्रा पूरी हो गई। उनके मुताबिक, रास्ते में मिलने वाले कांवड़िये जरूरत पड़ने पर पानी पिलाने, भोजन कराने और आराम करने की जगह बताने तक में मदद कर रहे हैं।
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