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दंगों वाले बयान से जब समर्थक बने विरोधी तब कन्हैया को देनी पड़ी सफाई

Wed, 30 Mar 2016 12:24 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
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कन्हैया कुमार - फोटो : अमर उजाला
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जेएनयू छात्रसंघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार एक बार फिर अपने एक बयान को लेकर विवादों में घिर गए हैं। बता दें कि कन्हैया कुमार ने एक कार्यक्रम में 1984 के सिख विरोधी दंगों और 2002 के गुजरात दंगों को अलग-अलग बताया था। कन्हैया ने कहा था कि 84 के दंगे भीड़ ने भड़काए थे जबकि गुजरात दंगे सरकार ने।
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कन्हैया के इसी बयान के बाद सोशल मीडिया समेत भाजपा व अन्य विपक्षी दलों ने कन्हैया के इस बयान का विरोध किया है। यही नहीं कन्हैया के इस बयान का उन लोगों ने भ‌ी विरोध किया है जो जेएनयू मामले में कन्हैया के साथ खड़े थे।

मालूम हो कि वामपंथी दलों के नेता तक कन्हैया के इस बयान के खिलाफ बोले हैं। भाजपा सांसद किरन खेर ने तो कन्हैया पर तीखा हमला भी किया और उनकी कड़ी आलोचना की। इस मामले को बढ़ता देख कन्हैया ने अपने बयान पर खुद ही सफाई दे दी है।
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आप सरकार ने क‌िया व‌िरोध

कन्हैया कुमार - फोटो : ANI
कन्हैया ने अपने ताजा विवादित बयान को लेकर सफाई देते हुए कहा है कि एक बार फिर उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया है। इसमें जरा भी संदेह नहीं है कि इमरजेंसी भारतीय लोकतंत्र के लिए एक काला दौर था। उन्होंने कहा कि चौरासी और 2002 दोनों ही दंगों में तबाही व नरसंहार के लिए सरकारें जिम्मेदार हैं।

देशद्रोह मामले में कन्हैया और जेएनयू के साथ दिखी आम आदमी पार्टी भी कन्हैया के इस बयान के साथ नहीं है। बुधवार को दिल्ली सरकार के मंत्री कपिल मिश्रा ने ट्वीट कर कहा कि '1984 हो या 2002 - दंगे नहीं कत्ले आम हुआ था, जिसे राज्य से समर्थन मिला था। कोई फर्क नहीं दोनों में। दोनों ही मामलों में न्याय नहीं मिला।'

वहीं स्वराज अभियान ने राष्ट्रद्रोह वाले मामले में जेएनयू का पूरी तरह से साथ दिया था लेकिन मंगलवार को इसके नेता योगेंद्र यादव ने ट्वीट कर कहा कन्हैया! एक बार फिर सहमत नहीं होने पर खेद है। 2002 और 1984 दोनों ही राज्य से चलाई गई इमरजेंसी थी।

सीपीआई(एमएल) मेंबर कविता कृष्णन भी कहती हैं, दोनों ही दंगे राज्य से प्रायोजित थे और इस मामले में वो कन्हैया से सहमत नहीं हैं।
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जेएनयू छात्रसंघ उपाध्यक्ष भी कन्हैया से असहमत

कन्हैया पर हमला - फोटो : ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
वहीं जेएनयू छात्रसंघ की उपाध्यक्ष शहला राशिद ने भी कन्हैया के इस बयान से असहमति जताई। शहला ने कहा कि मैं कन्हैया की उस स्पीच के दौरान नहीं थी मगर उनका बयान सही ‌रिपोर्ट किया गया है तो मेरा कहना है कि दोनों ही दंगों में राज्य सरकार का रोल था।

आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुचेता डे ने भी कहा है, भारत में जो लेफ्ट और प्रगतिशील छात्र आंदोलन शुरू हुआ है वो 84 के लिए कांग्रेस को क्लीन चिट नहीं दे सकता।
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