पूर्व राष्ट्रपति और देश की सेना को मिसाइल से लैस करने वाले मिसाइल मैन डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की आज पहली पुण्यतिथि है। आज ही के दिन डॉ. कलाम दुनिया को अलविदा कहकर चले गए थे। डॉ. कलाम का गुड़गांव से पुराना नाता रहा है।
नेशनल ब्रेन रिसर्च इंस्टीट्यूट (एनबीआरसी) और नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (एनएसजी) को डॉ. कलाम ने गुड़गांव की जमीं से कलर देश को समर्पित किया था। वे कई मौकों पर वह यहां आते रहे थे।
देश के इस हर दिल अजीज शख्सियत का गुड़गांव से खास लगाव था। वह यहां आने का कोई मौका नहीं छोड़ते थे। इसी तरह राष्ट्रपति रहते गुड़गांव का यदि कोई व्यक्ति मिलने गया तो कभी मिलने से इंकार नहीं किया।
इसके चलते ही अतुल कटारिया मेमोरियल स्कूल सहित शहर के तमाम स्कूल के बच्चे उनसे मिलते रहे। इसके अलावा नेशनल ब्रेन इंस्टीट्यूट और भोंडा कलां स्थित रिट्रीट सेंटर का उद्घाटन उन्होंने ही किया था। एनएसजी को कलर उनके ही हाथों से मानेसर में दिया गया था।
कई बार आए थे गुड़गांव
अब्दुल कलाम
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मारुति उद्योग के कार्यक्रमों में हिस्सा लेने के लिए भी वह यहां आते रहे थे। आईटीएम यूनिवर्सिटी (अब नॉर्थ कैंप यूनिवर्सिटी) के दीक्षांत समारोह में आधे घंटे तक यहां युवाओं को प्रेरित किया था। ऐसे कई उदाहरण हैं, जो साबित करते हैं उनके गुड़गांव से लगाव को।
बतौर राष्ट्रपति डॉ. कलाम मानेसर स्थित मारुति-सुुजुकी प्लांट में 25 मई, 2007 को आए थे। वहां कलाम से मिलने वाले आज भी खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। उन्होंने कंपनी के विजिटर बुक में अपने यह शब्द ‘टाइम हैज कम टू लॉन्च न्यू मॉडल्स ऑफ मारुति डिजाइनिंग, मारुति डेवलप्स एंड मारुति प्रोडयूस्ड कार्स कंपटेटिविली फॉर नेशनल एंड इंटरनेशनल मार्केट’ अंकित किए थे।
सेक्टर-23ए स्थित आईटीएम यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में 10 मार्च, 2011 को आए थे। इसी दौरान बोहड़ काला स्थित ओम शांति रिट्रीट सेंटर में भी गए। यहां उनका दौरा सेंटर के 13वें वार्षिक उत्सव पर हुआ था। वह यहां बतौर मुख्य अतिथि मौजूद रहे थे। 16 दिसंबर, 2013 को नेशनल ब्रेन रिसर्च सेंटर में आए थे। वह गुड़गांव में जहां भी आए उन्होंने युवाओं में जोश भर दिया था।
'नौकरी खोजने नहीं देने वाले बनें'
अब्दुल कलाम
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जिस कार्यक्रम में आए युवाओं को उनकी ताकत का एहसास करवाते रहे। आईटीएम यूनिवर्सिटी में उन्होंने युवाओं का आह्वान किया था कि वे नौकरी खोजने वाले नहीं बल्कि देने वाला बनने का प्रयास करें।
यूनिवर्सिटी के प्रो-वाइस चांसलर एसके शर्मा उनसे जुड़ी बातें बताते हैं कि जब वह यूनिवर्सिटी आए थे, एक-एक कर सभी बच्चों से मिले थे। बच्चों ने उन्हें घेर लिया था। हर किसी से ड्रीम पूछा और वहां पहुंचने तक की राह भी बताई। अब भी कलाम बहुत याद आते हैं। करीब डेढ़ घंटे का कार्यक्रम था, लेकिन बच्चों के बीच इतने मशगूल हो गए कि दो घंटे से अधिक समय बिताया था।
उनके नाम से शहर में एक पत्थर तक नहीं
डॉ. कलाम का नाता भले ही शहर से रहा, लेकिन इसके बावजूद कलाम के नाम पर शहर में एक पत्थर तक नहीं लगा है। पिछले साल उनके देहांत के समय नगर निगम के मेयर ने कलाम को श्रद्धांजलि स्वरूप गुड़गांव की किसी सड़क का नामकरण उनके नाम पर करने का एलान किया था, मगर इस पर अब तक अमल नहीं किया गया है। डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम मेमोरियल ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष नौशाद अख्तर ने गुड़गांव प्रशासन से अपील है कि यहां कलाम साहब की निशानी के तौर पर किसी सड़क या इमारत का नामकरण उनके नाम पर करें।