दो दिनों में दो बार सीएम का रूट बदले जाने के बाद अब कैलाश मानसरोवर भवन का स्थल भी बदल दिया गया है। अर्थला में जीटी रोड किनारे प्रस्तावित कैलाश मानसरोवर भवन के लिए अब इंदिरापुरम के शक्तिखंड में जमीन चिह्नित की गई है। हज हाउस के पास जिस जमीन को पूर्व में नगर निगम अफसरों ने कैलाश मानसरोवर भवन के लिए चिह्नित किया था, उस पर विवाद खड़ा हो गया है। यूपी जमींदारी विनाश एवं भूमि व्यवस्था अधिनियम-1950 के 1360 फसली रिकॉर्ड में यह जमीन झील के रूप में दर्ज है, हालांकि निगम के रिकॉर्ड में इस जमीन की नवैय्यत बंजर है।
नगर निगम ने जीटी रोड पर अर्थला के खसरा नंबर-1330, 1312 और 1313 की 8125 वर्ग मीटर जमीन को कैलाश मानसरोवर भवन बनाने के लिए चिह्नित किया था। खसरा संख्या-1330 की जमीन को लेकर शुरू से ही विवाद था। आरटीआई एक्टिविस्ट आकाश वशिष्ठ और सुशील राघव ने एनजीटी में डूब क्षेत्र की जमीन पर हज हाउस बनाए जाने के मामले में याचिका दाखिल कर रखी है।
कैलाश मानसरोवर भवन बनाने की घोषणा के बाद से ही आकाश वशिष्ठ और सुशील राघव इस पर भी विरोध जता रहे थे। उनका कहना है कि यह प्रस्तावित भूमि का बड़ा हिस्सा झील में दर्ज है। इसके बावजूद अफसरों ने इस पर ध्यान नहीं दिया और 31 अगस्त को सीएम के हाथों शिलान्यास का कार्यक्रम भी पक्का कर दिया।
उधर, झील की जमीन पर शिलान्यास प्रोग्राम तय कराए जाने की जानकारी जैसे ही सीएम योगी आदित्यनाथ तक पहुंची, वैसे ही उन्होंने मुख्य सचिव के माध्यम से स्थानीय अफसरों से इस पर जानकारी मांग ली। मामला शासन तक पहुंचा तो स्थानीय प्रशासनिक अफसरों के हाथ-पांव फूल गए। सूत्रों की मानें तो स्थानीय अफसरों को इस लापरवाही के लिए लखनऊ से फटकार लगी है।
इसके बाद सोमवार आधी रात तक डीएम, नगर आयुक्त, जीडीए वीसी समेत कई आला अधिकारी जमीन को लेकर मंथन करते रहे। अफसरों की बैठक में मानसरोवर भवन की जगह बदलने का निर्णय लिया गया। विकल्प के तौर पर मानसरोवर भवन के लिए इंदिरापुरम और मधुबन-बापूधाम में जमीन तलाशने का फैसला हुआ।
मंगलवार सुबह से ही जीडीए, नगर निगम और जिला प्रशासन के अफसरों की टीम ने दोनों स्थलों का जायजा लिया। इसके बाद इंदिरापुरम शक्तिखंड-4 स्थित कम्युनिटी सेंटर की करीब 9 हजार वर्ग मीटर जमीन को मानसरोवर भवन के लिए फाइनल कर दिया गया।