राजू उर्फ बाबा की हत्या के बाद पुलिस ने दीपक पंडित और उसके गैंग को दबोच लिया है। इसके बावजूद सूत्रों का कहना है कि दक्षिण और दक्षिण पूर्वी जिले में यह खूनी खेल लंबा चलेगा।
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राजू बाबा के गुर्गे दीपक पंडित गैंग से हिसाब बराबर करने की फिराक में रहेंगे। गैंगवार में पिछले कुछ माह के दौरान दोनों ओर से अब तक पांच लोगों की हत्या हो चुकी है।
वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की मानें तो दीपक ने अपने गैंग लीडर अजय उर्फ छोटू की तिहाड़ जेल में हुई हत्या का बदला लेने के लिए राजू की हत्या की। इससे पूर्व अजय उर्फ छोटू ने राजू बाबा के गैंग के तीन लोगों की हत्या कर दी थी।
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अवैध धंधों में वर्चस्व की लड़ाई है बहुत पुरानी
दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि दक्षिण और दक्षिण पूर्वी जिले में रवि गंगवाल और अजय उर्फ छोटू नामक बदमाशों के बीच लंबे समय से गैंगवार चल रही थी। दोनों ही गैंग विवादित प्रॉपर्टी, सट्टे, ड्रग्स और अन्य अवैध धंधे कर रहे थे।
दोनों में वर्चस्व की लड़ाई चल रही थी। स्पेशल सेल ने रवि को दबोच लिया, फिलहाल वह जेल में है। इसके बाद गैंग की कमान राजू बाबा ने संभाल ली। इस बीच अजय उर्फ छोटू, दीपक पंडित व उसके साथियों ने 2014 में राजू के करीब रोहित की संगम विहार इलाके में हत्या कर दी।
इसके बाद राजू के दो अन्य करीब सुमित और आकाश उर्फ अक्कू की भी 2014 में अजय ने हत्या करवा दी। पुलिस ने हत्या के आरोप में अजय को दबोच लिया। उसके तिहाड़ जाने के बाद भी राजू व उसके गैंग पर हमले नहीं रुके।
तभी से दीपक राजू के खून का प्यासा था
नवंबर 2014 में बदमाशों ने राजू पर गोली चला दी। हमले में राजू घायल हो गया। इधर, 11 मई 2015 को राजू उर्फ बाबा ने तिहाड़ जेल में बंद अजय उर्फ छोटू की अपने साथियों से हत्या करवा दी।
तभी से दीपक राजू के खून का प्यासा था। हालांकि, पकड़े जाने के बाद दीपक ने खुलासा किया है कि लगातार राजू उसके पास जल्द मरवाने का मैसेज भेज रहा था।
इसी वजह से उसने राजू को मारने की योजना बना ली। योजना के तहर शनिवार को वारदात को अंजाम दिया गया।
बच निकलने पर मिलने वाले थे कालकाजी
राजू उर्फ बाबा की हत्या करने के बाद बदमाश ग्रेटर कैलाश के एस-ब्लॉक के पार्क में घुसकर चारों ओर फैल गए। दीपक ने सभी बदमाशों से कहा कि वह किसी तरह फरार होकर कालकाजी में मिले। लेकिन, पार्क से भागने का एक ही रास्ता था। स्कॉर्पियो से दीवार तोड़ने के चक्कर में घायल हो चुके बदमाश पार्क से भाग नहीं पाए।
सर्च अभियान के बाद पांच बदमाशों को तो पकड़ लिया गया। लेकिन, कार का ड्राइवर अनूप घायल होने के बाद भी वहां से भाग गया। वारदात के बाद ग्रेटर कैलाश एसएचओ संदीप घई, इंस्पेक्टर अनिल मलिक ड्राइवर कांस्टेबल राजेंद्र और ऑपरेटर संजीव एक ही जिप्सी में बदमाशों का पीछा कर रहे थे।
संदीप के मुताबिक, सुबह करीब 4.30 कपिल पंवार को दबोचा गया। इसके कुछ ही देर बाद आर-एस ब्लॉक के गेट के पास से बिरेंद्र और शानू को पकड़ा। सुबह करीब 6.15 बजे घायल शंकर भी गिरफ्त में आ गया। सबसे आखिर में 6.30 बजे दीपक को दबोचा गया। एक राहगीर की निशानदेही पर पार्क के पास से ही दीपक को दबोच लिया गया। सभी के पास से हथियार मिले।
पुलिस की गिरफ्त में आए बदमाशों ने खुलासा किया कि वह राजू की हत्या करने के लिए पिछले चार-पांच दिनों से रेकी कर रहे थे। राजू कब और किसके साथ आता-जाता है, इसकी पूरी जानकारी रखी जा रही थी।
शनिवार को राजू अपने चार अन्य साथियों के साथ पेमेंट कलेक्ट करने गया था। उसने पांच-छह लाख रुपये इकट्ठे भी कर लिए थे। इसके बाद सभी कालका मंदिर गए। वहां दर्शन करने के बाद घर जा रहे थे।
रास्ते में पुलिस ने बाइक सवार राजू के दो साथियों को पेपर न होने की वजह से रोका भी था। दीपक व उसके साथी राजू का स्कॉर्पियों से पीछा कर रहे थे। जैसे ही राजू अपने दो साथियों के साथ रह गया तो वारदात को अंजाम दिया गया।