होली के त्यौहार के पहले ही दिल्ली में जल संकट गहरा गया है। दिल्ली को जलापूर्ति करने वाले भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड ने 25 मार्च से अगले एक महीने तक दिल्ली को जलापूर्ति नहीं करने की सूचना दी थी। इस दौरान बांध में मरम्मत का काम होगा और इस दौरान दिल्ली को होने वाली जलापूर्ति में 25 फीसदी तक की कमी आ सकती है। दिल्ली सरकार की कोशिश के बाद भी इस समस्या का हल नहीं निकाला जा सका है और इस कारण 25 मार्च से दिल्ली के अनेक इलाकों में पानी की समस्या विकराल रूप धारण कर सकती है।
देश की आज़ादी के समय दिल्ली के आसपास 1200 से ज्यादा सक्रिय तालाब थे, लेकिन वर्तमान स्थिति में इनमें से सौ तालाब भी सक्रिय स्थिति में नहीं रह गए हैं। ज्यादातर तालाबों पर भूमाफियाओं का कब्ज़ा हो गया है, उन पर झुग्गी-झोपडियां बन गई हैं या वे कचरा निस्तारण के केंद्र बन गए हैं। अनेक तालाबों पर सरकार ने ही स्कूल या सामुदायिक भवन बना दिया है। यही कारण है कि दिल्ली के भूजल का रिचार्ज नहीं हो रहा है और राजधानी का जलस्तर नीचे गिरता जा रहा है।
लेकिन राजधानी को जल के मामले में आत्मनिर्भर बनाने के लिए दिल्ली सरकार इन जोहड़ों को पुनर्जीवित करने की योजना पर काम कर रही है। इसके लिए प्राइवेट कंपनियों से संपर्क साधा जा रहा है। सरकार की कोशिश है कि इन तालाबों को पुनर्जीवित कर इनके मध्यम से दिल्ली का जल स्तर ऊपर उठाया जाये। इसके साथ ही इन्हें वाटर पार्क की तरह से विकसित करने पर भी विचार किया जा रहा है।
पुराने तालाबों को सक्रिय करने के साथ-साथ नए जल संग्रह केंद्र विकसित किए जाने का भी प्रयास चल रहा है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने 2016-17 में ही दिल्ली के मिलेनियम पार्क के पास बड़ा वाटर पार्क विकसित करने की बात कही थी। इसके आलावा दिल्ली के कई प्रमुख जगहों पर वर्ष जल संग्रह करने की योजना बनाई गई थी। दिल्ली सरकार अब इन जगहों पर जल संग्रह केंद्र विकसित कर दिल्ली की जलापूर्ति को हमेशा के लिए सुलझाना चाहती है।
अधिकारी के मुताबिक़, बड़े जल संग्रह केंद्र बनाने में काफी लंबा समय लगता है। इसके लिए भारी मात्रा में धन की भी आवश्यकता होती है। यही कारण है कि इस योजना को बनाते समय दिल्ली की भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखकर जल संग्रह केंद्र विकसित किये जाएंगे।