जुनैद हत्याकांड में महाराष्ट्र से गिरफ्तार किया गया भमरौला निवासी युवक नरेश सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करते-करते हत्यारा बन गया। उसके भाई सुरेश का कहना है कि यदि उसे पता होता कि 22 जून को ट्रेन में ऐसा हादसा हो जाएगा और उसके भाई के हाथों किसी की हत्या हो जाएगी, तो वह किसी भी कीमत पर उसे अपने से अलग दूसरे डिब्बे में नहीं बैठने देता। आरोपी नरेश के भाई सुरेश का यह भी कहना है कि जुनैद के साथी चाकू लेकर उस दिन ट्रेन में चढ़े थे।
इस बात को बताते हुए सुरेश ही नहीं, बल्कि उसके पिता पूर्व सैनिक इंदर सिंह व माता संतरा देवी की आंखों में आंसू बहने लगे। जहां उन्हें अपने बेटे के सिर पर हत्या का आरोप लगने का दुख है, वहीं पुलिस द्वारा की गई अब तक की कार्रवाई से रोष भी है। उनका कहना है कि ट्रेन में झगड़ा हुआ तथा जुनैद की मौत हो गई इसका भी उन्हें बहुत दुख है, लेकिन पुलिस ने आज तक इस मामले में केवल एक तरफा कार्रवाई की है। जबकि मुकदमा दोनों तरफ से होना चाहिए था।
पुलिस पर आरोप
मुख्य आरोपी नरेश को भागने में सहयोग करने वाले दो और आरोपियों की गिरफ्तारी न होना तथा पुलिस द्वारा हिरासत में लेने के बाद उन्हें छोड़ देना पुलिस की कार्रवाई पर लोगों की उंगली उठने लगी है। लोगों का कहना है कि उन दो आरोपियों में एक मुस्लिम समुदाय का भी युवक है तथा उसे व दूसरे युवक को राजनीतिक दबाव के चलते पुलिस गिरफ्तार नहीं कर रही है।
रात एक बजे भमरौला पहुंचा था नरेश
ट्रेन में झगड़े के दौरान जैसे ही जुनैद को चाकू लगे तो नरेश घबरा गया तथा अपने दो साथियों को मोटरसाइकिल लेकर असावटी स्टेशन पर बुलवा लिया। वहां से उनके साथ मोटरसाइकिल पर बैठकर गांव जटौला अपने मामा के यहां पहुंच गया तथा वहां से रात को करीब एक बजे अपने घर भमरौला पहुंचा और वहां से दूसरे दिन बंगलूरू का कहकर घर से चला गया।
चाकू लेकर चढ़े थे मृतक जुनैद के साथी
junaid murder accused
मुख्य आरोपी नरेश के भाई सुरेश ने बताया कि जिस दिन झगड़ा हुआ था, उस दिन जुनैद ने ही साथियों को स्टेशन पर बुलाया था। वे ही ट्रेन में चाकू लेकर आए थे, लेकिन आज तक पुलिस ने इस मामले में कोई सही जांच नहीं की। उसका कहना है कि इस झगड़े के दौरान जुनैद व उसके साथियों ने चाकू व चैन से पहले हमला किया। जिससे नरेश के सिर पर काफी चोट आईं थीं। सुरेश का कहना है कि पुलिस ने आज तक यह जानने का प्रयास नहीं किया है कि झगड़ा क्या था चाकू कहां से आया।
उसका आरोप है कि कुछ चंद नेताओं व पुलिस की कार्रवाई से आज यह मामला झगड़े का न होकर हिंदू-मुस्लिम का रंग ले चुका है। क्या नरेश या कोई अन्य हिंदू युवक मर जाता तो पुलिस इस तरह से कार्रवाई करती और नेता क्या इस तरह से करते, परंतु वोट बैंक की खातिर इसे जातिवाद का रंग दिया जा रहा है।
करेंगे नेताओं का बहिष्कार
junaid murder
गांव के पूर्व सरपंच सहजराम फते सिंह, ओम्वीर, पृथ्वी सिंह व प्रेमचंद का कहना है कि यह ठीक है कि जुनैद की मौत नरेश के हाथों हुई, परंतु आज तक पुलिस ने दोनों तरफ से कार्रवाई नहीं की और जिस तरह से नेता इस मामले को तूल दे रहे हैं, उसे लेकर गांव में रोष है। उन्होंने कहा कि गांव की तरफ से अब नेताओं का आगे पूरी तरह से बहिष्कार किया जाएगा।