न्यायाधीशों पर उनके फैसलों के कारण जानलेवा हमला हो सकता है क्योंकि उनके फैसले हमेशा किसी न किसी पक्ष के खिलाफ होते है। यह टिप्पणी रोडरेज के मामले में तीन दोषियों को 10-10 साल की सजा सुनाते हुये की है।
साकेत अदालत के तीन तत्कालीन जज अजय गर्ग, एमके नागपाल व इंदरजीत सिंह पर 17 मई 2012 को चार युवकों ने उस समय हमला कर दिया था जब वह सरकारी गाड़ी से फरीदाबाद जा रहे थे। इसमें जज जख्मी हो गये थे और उनकी सरकारी कार भी क्षतिग्रस्त हुई थी।
साकेत जिला अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश आरके त्रिपाठी ने मामले में दोषी अनिल राज, प्रशांत व रोहित को हत्या की कोशिश, सरकारी अधिकारी के काम में बाधा व सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का दोषी ठहराते हुये यह सजा सुनाई है।
कोर्ट ने दोषियों को सजा सुनाते हुये कहा कि दोषियों को कड़ी सजा देना जरूरी था। इन निर्लज्ज दोषियों को किसी भी तरह माफ नहीं किया जा सकता क्योंकि उन्होंने इस कृत्य को जानबूझकर अंजाम दिया था।
अदालत ने दोषियों के इस अपराध ने समाज के विवेक को झकझोरा था और यह संदेश दिया था कि कोई भी सुरक्षित नहीं है। दोषियों ने न केवल सरकारी अधिकारियों को अपमानित किया बल्कि खुद को कानून से ऊपर साबित करने की कोशिश की।
कोर्ट ने अपने फैसले में इस बात पर भी गौर किया कि दोषियों ने लगातार जजों की कार पर ईंटे बरसाईं और एक जज को कॉलर से पकड़ कर बाहर खींच लिया। दोषियों ने उसके कपड़े फाड़ दिये। इससे ळ्साबित होता है कि दोषी इन जजों को जान से मारना चाहते थे।
सरकारी कार को क्षति पहुंचाने के लिये अदालत ने तीनों दोषियों पर 45 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। पेश मामले में तीन युवकों पर मुकदमा चला था जबकि एक युवक को अदालत ने भगौड़ा घोषित कर दिया था।