एसी के बढ़ते प्रयोग और उससे पर्यावरण को होने वाले नुकसान को ध्यान में रखकर सेक्टर-62 स्थित जेएसएस संस्थान ने एसी के विकल्प विकसित किए हैं। कॉलेज ने ऐसा सिस्टम विकसित किया है, जिससे बिना एसी का प्रयोग किए कमरे का तापमान सात डिग्री तक कम किया जा सकता है।
लड़कों के हॉस्टल में इसका कई वर्षों से प्रयोग भी किया जा रहा है। कॉलेज ने हॉस्टल में एसी हटाकर पर्यावरण संरक्षण की ओर कदम बढ़ाया है। साथ ही, रेन वाटर हार्वेस्टिंग के लिए भी यहां 15 यूनिट लगाई गई हैं, ताकि जल संरक्षण, बिजली की बचत व स्वच्छता जैसे कार्यों में योगदान दिया जा सके।
यह है सिस्टम
जेएसएस कॉलेज ने ऐसा सिस्टम विकसित किया है, जहां वातावरण से स्वच्छ हवा को इकट्ठा कर जमीन की निचली सतह पर ले जाकर ठंडा किया जाता है। इसके बाद इसे हॉस्टल के कमरों में पहुंचाया जाता है। यह तकनीक देश में अपनी तरह का एकमात्र प्रयोग है। जमीन के अंदर की कुछ सतहों में कुछ स्थानों पर तापमान बहुत ठंडा होता है, जो वहां की हवा में ठंडक पैदा करता है। इसी ठंडी हवा का प्रयोग कर कॉलेज में तापमान को कम किया जाता है। इसके लिए छह कूलिंग टावर बनाए गए हैं, जो इस प्रक्रिया में मदद देते हैं।
60 फीसदी हरियाली
demo pic
कॉलेज के प्राचार्य डॉ. जीएम पाटिल ने बताया कि कॉलेज ई-वेस्ट मैनेजमेंट, रेनवाटर हार्वेस्टिंग और बिजली की बचत के लिए कई प्रयोग कर रहा है। 20 एकड़ में कॉलेज बना है, जिसमें 60 प्रतिशत हिस्से को ग्रीन एरिया, 20-20 प्रतिशत बिल्डिंग व सड़क का रखा गया है।
कॉलेज को जीरो वेस्ट कैंपस बनाने का लक्ष्य है। हमारी प्रमुखता प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर प्रयोग और पर्यावरण संरक्षण हैं। बारिश के पानी को कैंपस में ही रोककर संस्थान की 15 रेनवाटर हार्वेस्टिंग यूनिट के जरिये इस्तेमाल करते हैं। 600 छात्र संख्या वाले हॉस्टल में संस्थान बिजली की बड़ी बचत करता है।
पूरे कैंपस में एलईडी लाइटों की व्यवस्था की गई है। बिजली जाने पर सौर ऊर्जा से यूपीएस सिस्टम जोड़े गए हैं। इसके अलावा बायो-डीजल और मेडिसन प्लांट भी लगाए गए हैं। संस्थान में करीब 1000 मेडिसिन प्लांट हैं, जो कैंसर जैसी बीमारियों के उपचार में मददगार हैं।
ग्रीन कैंपस का अवॉर्ड मिला
demo pic
पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता में योगदान के लिए जेएसएस संस्थान नोएडा को एआईसीटीई की ओर से उत्तर भारत क्षेत्र में पहला और भारत में सातवां स्थान मिला है। एआईटीसीई द्वारा देशभर में ग्रीन कैंपस के लिए एक सर्वे कराया गया था।
इसके तहत कैंपस में स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण में योगदान व प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर प्रयोग आदि विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखकर कॉलेजों को रैंक दी गई थी। एआईसीटीई ने देश में 4408 इंजीनियरिंग कॉलेजों को स्वीकृति दी है।
इसके उत्तरीय क्षेत्रीय कार्यालय के अंतर्गत उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और बिहार के कॉलेज आते हैं, जिनमें से जेएसएस को ग्रीन कैंपस के लिए प्रथम स्थान दिया गया है। प्रतियोगिता में 20 राज्यों से 172 संस्थानों को एंट्री दी गई थी।