दरअसल, इस परियोजना पर काम करने का प्रस्ताव 2016 में रखा गया था, लेकिन इस पर काम आगे नहीं बढ़ पाया। परियोजना का मकसद यह है कि मोदी मिल फ्लाईओवर से आईआईटी दिल्ली गेट चौराहे तक का सफर बाधा मुक्त किया जाए। इस 7.2 किलोमीटर के सफर में लाल बत्तियों पर जाम सबसे बड़ी अड़चन है। पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों का कहना है कि 7.2 किलोमीटर के मार्ग पर रोजाना औसतन दो लाख से अधिक वाहनों की आवाजाही होती है। इसमें खेल गांव, सावित्री सिनेमा, चिराग दिल्ली, कालकाजी और मोदी मिल पर फ्लाईओवर बने हुए हैं। योजना के तहत सभी फ्लाईओवर को एकीकृत किया जाएगा।
यहां होती है सबसे बड़ी अड़चन...
आउटर रिंग रोड पर कालकाजी और सावित्री सिनेमा फ्लाईओवर बना हुआ है। लेकिन यह सिंगल फ्लाईओवर है। यह दोनों फ्लाईओवर आईआईटी की ओर बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करते हैं, लेकिन आईआईटी से आने वाले और ओखला की ओर जाने वाले वाहनों के लिए फ्लाईओवर नहीं है। ऐसे में यहां पर लाल बत्तियों पर जाम की स्थिति बनती है। ऐसे में यहां बने हुए दोनों फ्लाईओवर के समानांतर दो आधे फ्लाईओवर का निर्माण किया जाएगा। जिससे आईआईटी की तरफ से आने वाले वाहन ओखला की तरफ सीधे निकल सकें।
बैक-टू-बैक यू-टर्न व्यवस्था की जाएगी लागू...
अधिकारियों का कहना है कि आउटर रिंग रोड का 7.2 किलोमीटर का हिस्सा दक्षिण पूर्वी दिल्ली क्षेत्र में रहने वाले लोगों के लिए प्रमुख खंडों में से एक है। यह ग्रेटर कैलाश, पंपोश एन्क्लेव और पंचशील एन्क्लेव जैसे आवासीय इलाकों से घिरा हुआ है। यहां पर हर 500-600 मीटर की दूरी पर कई लाल बत्तियां हैं। जो ओखला औद्योगिक क्षेत्र, सुखदेव विहार, सीआर पार्क, कालकाजी मंदिर, नेहरू प्लेस और ग्रेटर कैलाश जैसे क्षेत्रों को कनेक्टिविटी प्रदान करते हैं। एक बार निर्माण कार्य पूरा हो जाने के बाद सभी लाल बत्तियों को हटा दिया जाएगा और बैक-टू-बैक यू-टर्न व्यवस्था लागू की जाएगी। जिससे वाहनों का दबाव कम होगा और जाम की स्थिति नहीं बनेगी।
व्यस्त समय में होती है सबसे अधिक परेशानी...
मोदी मिल से आईआईटी दिल्ली के बीच कई फ्लाईओवर बने हुए हैं। लेकिन दो जगहों पर सिंगल फ्लाईओवर होने और लाल बत्तियों के कारण यहां पर व्यस्त समय में अधिक परेशानियां होती है। अधिकारियों का कहना है कि परियोजना पूरी होने के बाद वाहन चालकों के 20 से 30 मिनट बचेंगे। अधिकारियों ने बताया कि वित्तीय मंजूरी मिलने के बाद टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी।