जीडीए के साथ मिलकर हाउसिंग स्कीम लाने की योजना अब फाइलों में बंद होने वाली है। महापौर और पार्षदों के बाद अब नगर आयुक्त ने भी ज्वाइंट वेंचर हाउसिंग स्कीम से हाथ पीछे खींच लिए हैं।
उन्होंने सरकारी जमीन किसी अन्य विभाग को देने से इनकार किया है। उनसे पहले महापौर इस हाउसिंग स्कीम से इनकार कर जीडीए की बजाय दूसरे विकल्प तलाशने की बात कह चुके हैं।
तकरीबन एक साल पूर्व जीडीए और नगर निगम ने मिलकर सरकारी जमीनों पर हाउसिंग स्कीम लाने की तैयारी शुरू की थी। पूर्व नगर आयुक्त आरके सिंह ने इस पर काम भी शुरू करा दिया था।
निगम का संपत्ति विभाग जमीनों को चिह्नित कर रहा था। दोनों विभागों को मिलकर ऐसी जमीनों पर हाउसिंग स्कीम तैयार करनी थी जिन पर फिलहाल कब्जा हो चुका है। अब नगर आयुक्त अब्दुल समद का कहना है कि नगर निगम हाउसिंग स्कीम नहीं लाएगा।
मेट्रो फंड की एवज में दी जमीनों की कीमतों का आंकलन कराएगा निगम
मेट्रो फंड जुटाने के लिए जीडीए को दी गई जमीनों की कीमतों का आंकलन अब नगर निगम दोबारा कराएगा। निगम अधिकारियों का कहना है कि जीडीए की ओर से तय किया गया 138 करोड़ रुपया बेहद कम है।
इन जमीनों का मार्केट रेट कई गुना ज्यादा है। जीडीए से जमीनों की रकम लेने के लिए निगम ने रिमाइंडर भी भेजा है। नगर आयुक्त अब्दुल समद का कहना है कि राजनगर एक्सटेंशन, कौशांबी, भोवापुर, नूरनगर, सिहानी में पुनग्रहीत की गई जमीनों की कीमत बेहद कम आंकी गई हैं।
उनका कहना है कि इन जमीनों की कीमतों का आंकलन दोबारा करने के लिए जीडीए से वार्ता करेंगे। इस फंड को निगम के खाते में ट्रांसफर करने के लिए भी पत्र भेजा है।