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जेएनयू हिंसा: जांच के लिए पहुंची दिल्ली पुलिस, कांग्रेस ने भी बनाई कमेटी

Tue, 07 Jan 2020 10:24 PM IST
पूजा त्रिपाठी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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जेएनयू में मंगलवार को फिर पहुंचे क्राइम ब्रांच के अधिकारी - फोटो : एएनआई
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दिल्ली पुलिस ने जेएनयू हिंसा मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए अज्ञात लोगों के खिलाफ दंगा भड़काने व सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की धाराओं में तीन मुकदमे दर्ज किया है। इस मामले में सोमवार शाम तक पुलिस को कोई शिकायत नहीं मिली थी। मामले की जांच स्थानीय पुलिस से लेकर अपराध शाखा को सौंप दी गई है। हालांकि हमले को दो दिन हो गए हैं लेकिन एक भी आरोपी अब तक गिरफ्तार नहीं किया जा सका है। दिनभर का अपडेट जानिए--

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सोनिया ने बनाई कमेटी


जेएनयू हिंसा पर कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने चार सदस्यों की कमेटी बनाई जो जेएनयू पहुंचेगी और तथ्यों का पता लगाकर रिपोर्ट सौंपेगी। 





जानिए अब तक की पुलिस जांच के क्या हैं अपडेट..

  • पुलिस उन व्हाट्सएप के स्क्रीनशॉट्स की जांच भी कर रही है जो सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे थे और उनके नंबरों की भी पहचान कर ली गई है। उनमें से अधिकतर नंबर स्विच ऑफ आ रहे हैं। लेकिन इन नंबरों की लोकेशन हिंसा के वक्त कहां थी सीडीआर से ले लिया जाएगा।
  • 3 जनवरी को जेएनयू के सीसीटीवी सर्वर को क्षतिग्रस्त कर दिए जाने की वजह से अपराध शाखा के लिए ये मुश्किल हो रहा है कि वह हिंसा में संलिप्त आरोपियों की पहचान कर पाएं। पुलिस को सीसीटीवी फुटेज नहीं मिल रहे क्योंकि सर्वर तीन जनवरी को क्षतिग्रस्त कर दिए थे। इस संबंध में एक एफआईआर भी दर्ज की गई है।
  • जेएनयू के वीसी मंगलवार को फिर सामने आए उन्होंने जानकारी दी है विश्वविद्यालय में सर्वर ने काम करना शुरू कर दिया है। अब छात्र रजिस्ट्रेशन फिर से करा सकते हैं। वीसी ने कहा है कि उन्हें घायल छात्रों से पूरी हमदर्दी है लेकिन विश्वविद्यालय में हिंसा की कोई जगह नहीं है।
  • जेएनयू मामले की जांच के लिए बनाई गई कमेटी की प्रमुख ज्वाइंट सीपी शालिनी सिंह ने बताया है कि वारदात वाली सभी जगहों पर गए और छात्रों से बात की। उन्होंने हम पर भरोसा जताया और कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां दी हैं।
  • इस मामले में सरकारी सूत्रों के हवाले से बड़ा अपडेट सामने आ रहा है कि जेएनयू हमले में शामिल लोगों की पहचान करने के लिए पुलिस वीडियो फुटेज, चेहरे पहचानने की प्रणाली का इस्तेमाल कर रही है।
  • 100 से ज्यादा कैमरों के वीडियो कब्जे में ले लिए गए हैं।
  • क्राइम ब्रांच आज फिर जेएनयू कैंपस में जांच के लिए पहुंची।
  • 34 लोगों के बयान ले लिए गए हैं।
  • आईशी घोष पर सर्वर रूम में तोड़फोड़ करने के आरोप में एफआईआर दर्ज।

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वहीं दूसरी ओर जेएनयू प्रशासन ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय को पूरे मामले की प्राथमिक रिपोर्ट सौंप दी है। अपराध शाखा की कई टीमों ने सोमवार सुबह जेएनयू पहुंचकर जांच शुरू कर दी। पुलिस ने मौके से कुछ सैंपल भी उठाए। दिल्ली पुलिस ने इस बात से इंकार किया है कि जेएनयू हिंसा में बाहरी व्यक्ति शामिल थे। सोमवार को भी माहौल तनावपूर्ण था और कैंपस के अंदर व बाहर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात था।

जिला पुलिस उपायुक्त देवेंद्र आर्या ने बताया कि एफआईआर में किसी को नामजद नहीं किया गया है। वसंत कुंज (नार्थ) थानाध्यक्ष रितुराज की शिकायत पर स्वत: संज्ञान लेते हुए एफआईआर दर्ज की गई है। उन्होंने बताया कि सोमवार देर शाम तक पुलिस को जेएनयू यूनिवर्सिटी समेत किसी पक्ष से कोई शिकायत नहीं मिली थी।

आईशी घोष के खिलाफ एफआईआर दर्ज - फोटो : अमर उजाला
उपायुक्त का कहना है कि रविवार शाम को 4.57 बजे जेएनयू कैंपस में झगड़े की कॉल मिली थी। पुलिस कैंपस में गई थी। पुलिस माहौल को शांत कराकर वापस आ गई थी। पुलिस को कैंपस में सब कुछ सामान्य लगा था। इसके बाद पुलिस को 7.12 बजे दोबारा झगड़े की सूचना मिली थी।

इस पर पुलिस दोबारा वहां गई थी। इसके बाद पुलिस ने वहां फ्लैग मार्च कर स्थिति को नियंत्रित किया था। उन्होंने बताया कि जेएनयू हिंसा मामले में 34 लोगों की एमएलसी बनी है। 

हालांकि पुलिस उपायुक्त ने इस बात से साफ इंकार किया है कि जेएनयू कैंपस हिंसा में कोई बाहरी व्यक्ति था। अगर लोग आरोप लगा रहे हैं तो इसकी जांच की जाएगी। सोशल मीडिया व सीसीटीवी फुटेज के आधार पर नकाबपोश आरोपियों की पहचान की जा रही है। सोमवार शाम तक किसी आरोपी की पहचान नहीं हुई थी और न ही किसी को गिरफ्तार किया गया था। एफएसएल टीम ने मौके से कई नमूने उठाए थे। 

पुलिस को सोमवार को 46 कॉल मिली थी
पुलिस उपायुक्त के मुताबिक जेएनयू हिंसा मामले में पुलिस को कुल 46 कॉल मिली थीं। सबसे पहली कॉल मिलने पर पीसीआर वैन कैंपस में गई थी। पुलिस वैन में तैनात पुलिसकर्मियों ने हालात सामान्य बताए थे। 

पुलिस को मिले हमलावरों के महत्वपूूर्ण सुराग

- फोटो : अमर उजाला
जेएनयू हिंसा के मामले में दिल्ली पुलिस ने एक बार फिर कहा है कि झगड़ा छात्रों के दो गुटों में हुआ था। ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन को लेकर झगड़ा चल रहा था। पुलिस को हमलावरों के बारे में महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं। संयुक्त पुलिस आयुक्त शालिनी सिंह की देखरेख में फैक्ट फाइंडिंग (तथ्यान्वेषी) कमेटी बनाई गई है।

दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता मंदीप सिंह रंघावा ने सोमवार शाम कहा कि कोर्ट के आदेश से जेएनयू के प्रशासनिक ब्लाक में पुलिस रहती है, मगर जिस जगह हिंसा हुई, वह इससे काफी दूर है। 5 बजे पीसीआर कॉल मिली तो पुलिस तुरंत अंदर गई थी।

जेएनयू प्रशासन की अनुमति के बाद दिल्ली पुलिस कैंपस में भीतर घुसी। मामले की जांच अपराध शाखा को सौंप दी गई है। उनके मुताबिक, जेएनयू में अपनी सिक्योरिटी होती है। जांच होगी कि जेएनयू के अंदर कौन और किसके साथ गया था।

जेएनयू में सभी की एंट्री होती है। पुलिस के हाथ हमलावरों के बारे में महत्वपूर्ण सुराग लगे हैं। आरोपियों के खिलाफ जल्द कार्रवाई की जाएगी। अपराध शाखा की कई टीमें बनाई गई हैं। इन्होंने सोमवार को जेएनयू जाकर मुआयना किया। 

शनिवार को भी कैंपस में हुई थी हिंसा

- फोटो : अमर उजाला
जेएनयू कैंपस में शनिवार को भी हिंसा हुई थी। हालांकि इसकी सूचना बाहर नहीं आई थी। दक्षिण-पश्चिमी जिला डीसीपी देवेंद्र आर्या ने बताया कि शनिवार को हुई हिंसा के मामले में वसंत कुंज (नार्थ) थाने में दो एफआईआर दर्ज की गई हैं।

अधिकारियों के मुताबिक, पुलिस ने स्वत: संज्ञान लेते हुए डीडी एंट्री पर दो एफआईआर दर्ज की हैं। इनमें किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया है और न ही किसी आरोपी की पहचान हुई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच के बाद इस मामले में जल्द ही चार्जशीट कर दी जाएगी।

बताया जा रहा है कि इन एफआईआर की जांच भी अपराध शाखा को सौंप दी गई है। हालांकि सवाल यह भी है कि कैंपस का माहौल पहले से तनावपूर्ण था तो पुलिस ने सुरक्षा को क्यों नहीं बढ़ाया। 

सोशल मीडिया के वीडियो की भी होगी जांच

- फोटो : अमर उजाला
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जेएनयू हिंसा के बाद जितने भी वीडियो सोशल मीडिया पर चल रहे हैं, पुलिस उनके आधार पर भी जांच करेगी। पुलिस सभी वीडियो को कब्जे में लेगी। एक वीडियो ऐसा चल रहा है, जिसमें जेएनयू छात्र संघ अध्यक्ष साबरमती हॉस्टल में दिखाई दे रही हैं। कुछ देर बाद वह पेरियर हॉस्टल में दिखाई दे रही हैं।

तीन टीमों को अलग-अलग काम सौंपा
अपराध शाखा ने हिंसा की जांच शुरू कर दी है। इसके लिए तीन टीमें बनाकर सबको अलग-अलग काम सौंपा गया है। एक यूनिट जेएनयू कैंपस में लगे सीसीटीवी की फुटेज एकत्र कर रही है। दूसरी यूनिट आरोपियों की धरपकड़ करेगी। तीसरी यूनिट वायरल हो रहे वीडियो व उकसाने वाले वीडियो की जांच करेगी।
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जेएनयू हिंसा के खिलाफ लेफ्ट नेता सीताराम येचुरी और प्रकाश करात ने भी किया प्रदर्शन। 

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