कुलपति: यह बिल्कुल निराधार आरोप हैं कि मैं छात्रों और शिक्षकों से बातचीत या मिलता नहीं हूं। महीने का पहला सोमवार छात्रों, दूसरा शिक्षकों और तीसरा स्टाफ से मुलाकात का दिन होता है। इस शेड्यूल के तहत कोई भी बिना पूर्व सूचना के कुलपति कार्यालय में आकर मिल सकता है। इसके अलावा भी छात्र, शिक्षक या कर्मी आकर मुझसे अपनी दिक्कत पर मिल सकता है। मैंने कभी किसी से मुलाकात या बातचीत के लिए मना नहीं किया। सिर्फ जब आईआईटी में कक्षा होती है तो आठ से 8:50 बजे तक जाता हूं। इसके अलावा सारा समय कैंपस में मौजूद होता हूं। सभ्य ढंग व शालीनता से बात संभव होती है, लेकिन मैंने छात्रों या शिक्षकों से बातचीत की कोशिश की तो वे मारपीट पर उतर आते हैं। मेरे अलावा डीन ऑफ स्टूडेंट, एसोसिएट डीन, रजिस्ट्रार, चीफ प्रोक्टर, प्रोक्टर, रेक्टर, वार्डन आदि प्रशासनिक अधिकारी छात्रों से सीधे संपर्क में रहते हैं। ऐसा नहीं है कि कैंपस में प्रशासनिक अधिकारी कोई बात ही नहीं करता है।
सवाल: हॉस्टल फीस बढ़ोतरी पर तीन महीनों से बवाल के बीच आपने क्या किया?
कुलपति: हॉस्टल फीस बढ़ोतरी का फैसला एकदम से नहीं थोपा गया था। रजिस्ट्रार, डीन ऑफ स्टूडेंट, एसोसिएट डीन, चीफ प्रॉक्टर, प्रॉक्टर, रेक्टर, वार्डन के अलावा सभी विभाग प्रमुख को भी इसकी सूचना दी गयी थी। सभी की सहमति के साथ इसे पब्लिक डोमेन में डालकर सुझाव भी मांगे गए थे। सात अक्तूबर को विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर अपलोड हो चुका था। हालांकि छात्रों को दिक्कत थी तो आकर बात करते। सभी की मंजूरी के बाद इसे हॉस्टल कमेटी की बैठक में लेकर जाया गया। हालांकि उसमें छात्रों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। छात्रों से बातचीत की कई बार कोशिश हुई, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। हॉस्टल फीस बढ़ोतरी से हॉस्टल में सुधार होगा। हालांकि छात्रों की मांग पर संशोधित हॉस्टल फीस प्रस्ताव पास किया गया। इसमें 45 फीसदी तक कमी की गयी, लेकिन फिर भी विरोध जारी रहा।
सवाल: कैंपस को सामान्य बनाने के लिए किस प्रकार काम किया जा रहा है?
कुलपति: विश्वविद्यालय में तीन महीने से आंदोलन चल रहा है। कक्षाओं के बाद दिसंबर सेमेस्टर परीक्षा का भी बहिष्कार किया गया। अब विंटर सेमेस्टर रजिस्ट्रेशन करने से भी छात्रों और लैब व क्लास में शिक्षकों को जाने से रोक रहे हैं। फिर भी 3300 छात्रों ने रजिस्ट्रेशन करा लिया है। रजिस्ट्रेशन के बाद कक्षाएं शुरू होंगी। जो पढऩा चाहते हैं, उन्हें रोकना गलत है।
सवाल: सर्वर बंद करने के आरोप में छात्रों के खिलाफ प्रशासन ने मामला दर्ज करवाया?
कुलपति: अपनी बात रखने के लिए विरोध करने की स्वतंत्रता है। जेएनयू संस्कृति भी रही है, लेकिन अपनी बात रखने के लिए सर्वर बंद करके विश्वविद्यालय के कामकाज को शटडाउन करना गलत था। इसके चलते पूरा कामकाज प्रभावित हुआ। महंगे उपकरण व केबल को काटा गया व तोडफ़ोड़ की गयी। सर्वर डाउन व तोडफ़ोड़ के चलते वहुत सा डेटा हमारे पास नहीं है।
सवाल: दीपिका पादुकोण के कैपस में आकर प्रदर्शनकारियों के समर्थन को किस प्रकार देखते हैं?
कुलपति: बॉलीवुड अभिनेत्री ने कैंपस में आकर प्रदर्शनकारियों को समर्थन दिया, अच्छी बात है। हालांकि हजारों छात्र जो विंटर सेमेस्टर में रजिस्ट्रेशन करके पढ़ाई और वे शिक्षक जो लगातार कक्षा लेकर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं, उनके भी अधिकार हैं। उन्हें ऐसे छात्रों के अधिकारों के बारे में भी सोचना चाहिए, उन्हें भी समर्थन देना चाहिए था। क्योंकि अधिकार तो सबके बराबर हैं।
सवाल: विश्वविद्यालय ठीक से नहीं संभालने के आरोप लग रहे हैं। बार-बार इस्तीफे की मांग हो रही है?
कुलपति: विश्वविद्यालय को अकादमिक क्षेत्र में दुनिया के सर्वश्रेष्ठ में शामिल करना जरूरी है। इसीलिए इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट, सिक्योरिटी के अलावा डिजास्टर स्पेशल सेंटर भी खोले गए हैं। छात्रों को विभिन्न विषयों की जानकारी होना आज की तारीख में बहुत जरूरी है। जेएनयू ने देश में पहला ऐसा पांच वर्षीय इंजीनियरिंग प्रोग्राम शुरू किया है, जिसमें चार साल तकनीकि तो पांचवें साल सोशल साइंस व लैंग्वेज की भी पढ़ाई कराई जाएगी। कैंपस को आगे लेकर जाना मेरी जिम्मेदारी है। इंजीनियरिंग क्षेत्र से होने का यह मतलब नहीं कि मैं विश्वविद्यालय को नहीं संभाल पा रहा। हालांकि दिक्कतें बहुत हैं। इसलिए मैं इतना ही कहता हूं कि रिसर्चर हूं, इसलिए हर दिक्कत का समाधान भी कर ही लूंगा।