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Delhi NCR News: पीएचडी प्रवेश परीक्षा बहाली के लिए जेएनयू छात्र संघ करेगा भूख हड़ताल

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हॉस्टल खाली करने के नोटिस और प्रॉक्टोरियल जांच वापस लेने की भी मांग
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अमर उजाला ब्यूरो

नई दिल्ली। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) छात्र संघ ने पीएचडी दाखिले के लिए विश्वविद्यालय की प्रवेश परीक्षा बहाल कराने की मांग को लेकर बृहस्पतिवार से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल का ऐलान किया है। छात्र संघ ने पीएचडी शोधार्थियों के हॉस्टल खाली करने के नोटिस वापस लेने और एक प्रदर्शन के मामले में छात्रों के खिलाफ प्रॉक्टोरियल जांच रद्द करने की भी मांग की है।

छात्र संघ के अध्यक्ष नीतीश कुमार ने कहा कि प्रवेश परीक्षा बहाली की मांग को लेकर पिछले वर्ष अगस्त महीने में 16 दिन की भूख हड़ताल की गई थी। उस समय जेएनयू कुलगुरु और प्रशासन ने माना था कि वह 2025 में पीएचडी दाखिला विश्वविद्यालय की प्रवेश परीक्षा से देंगे। मगर, अब अप्रैल माह में नई यूनियन के चुनकर आने पर वित्तीय फंड न होने का हवाला देकर प्रवेश परीक्षा के आयोजन से मना कर दिया गया।
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छात्र संघ ने प्रवेश परीक्षा बहाली के लिए एक जनमत भी कराया था। इसमें 1500 के लगभग छात्रों ने हिस्सा लिया और 94 फीसदी ने परीक्षा के समर्थन में मत दिया। जनमत का परिणाम कुलगुरु को सौंपने के लिए गए तो उन्होंने मुलाकात से मना कर दिया। इसको लेकर तर्क दिया गया कि जब तक छात्र संघ के संयुक्त सचिव भी साथ नहीं आएंगे तो मुलाकात नहीं करेंगे। संयुक्त सचिव एबीवीपी से चुनकर आए हैं। उन्होंने कहा कि यह प्रशासन और एबीवीपी के बीच का गठजोड़ है। एबीवीपी जेएनयू की प्रवेश परीक्षा की बहाली के समर्थन में नहीं है।
वहीं, छात्र संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि पीएचडी बैच के शोधार्थियों को हॉस्टल खाली करने के नोटिस दिए जा रहे है कि उन्हें चार साल के बाद हॉस्टल खाली करना होगा। इस साल बराक हॉस्टल खोलने और जेएनयू छात्र संघ चुनाव कराने की मांग को लेकर प्रदर्शन करने पर 30 छात्रों के खिलाफ प्रॉक्टोरियल जांच के निर्देश दिए गए। हमारी मांग है कि हॉस्टल खाली करने के नोटिस और प्रॉक्टोरियल जांच को वापस लिया जाएं। 26 जून को रात नौ बजे गंगा ढाबा से लेकर साबरमती तक मशाल जुलूस निकालकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की जाएगी।
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एबीवीपी सीईयूटी से ही दाखिले के पक्ष में
जेएनयू छात्र संघ के संयुक्त सचिव और एबीवीपी सीईयूटी और एनटीए के साथ खड़े है। उनके अनुसार सीईयूटी से ही दाखिला करवाने से विस्वविद्यालय का पैसा और समय बचता है। वहीं, बाकी छात्र संघ के पदाधिकारी और अन्य छात्र संगठन जेएनयू की अपनी प्रवेश परीक्षा के बहाली के पक्ष में है।
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