प्री-पोल डिबेट को केवल जेएनयू तक सीमित रखने की बजाए इसे अन्य संस्थानों तक ले जाना चाहिए। हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी जेएनयू में एनएसयूआई की ओर से अध्यक्ष के उम्मीदवार विकास यादव की याचिका पर फैसला सुनाते हुए की है। जेएनयू ने जुर्माना न भरने के आधार पर आदेश जारी कर विकास का नामांकन रद्द कर दिया था। इस आदेश को हाईकोर्ट ने सोमवार को रद्द कर दिया था।
जस्टिस सिद्घार्थ मृदुल ने विकास यादव की याचिका पर सुनवाई करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद से पूछा था कि प्री-पोल डिबेट केवल जेएनयू तक ही सीमित क्यों रहे। आप को इसे दूसरे संस्थानों तक लेकर जाना चाहिए।
यह डिबेट अमेरिका, रूस व मैक्सिको जैसे कई देशों में राष्ट्रपति पद के उम्मीदवारों के बीच होता है और इसका टीवी पर प्रसारण किया जाता है। हाईकोर्ट को बताया गया कि जेएनयू छात्रसंघ का चुनाव 14 सितंबर को होना है और उससे पहले अध्यक्ष पद के उम्मीदवारों के बीच 12 सितंबर को प्री-पोल डिबेट होगी। इसके बाद हाईकोर्ट ने अपना सुझाव दिया।
जेएनयू प्रशासन ने पीएम मोदी के बयान के खिलाफ कैंपस में पकोड़े बेचने के मामले में विकास यादव पर 20 हजार का जुर्माना लगाया था। विकास ने ऐसा पीएम के उस बयान के विरोध में कहा था कि पकोड़ा बेचना भी रोजगार का विकल्प हो सकता है। विकास से जुर्माने के आदेश को वीसी के समक्ष चुनौती दे रखी है। हाईकोर्ट ने इस मामले में कहा था कि वीसी के समक्ष विचाराधीन याचिका का निबटार होने तक विकास पर कोई कड़ी कार्रवाई न की जाये लेकिन जेएनयू ने जुर्माना न भरने पर विकास का नामांकन सात सितंबर को रद कर दिया था।