जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्रसंघ का चुनाव इस बार लेफ्ट और राइट के बीच होगा। तैयारियों के बीच छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार ने मोदी की नीतियों पर हमला किया तो भाजपा सांसद और दिल्ली प्रदेशाध्यक्ष मनोज तिवारी ने ‘एक शाम शहीदों के नाम’ से देशभक्ति की अलख जगाई।
कैंपस में छात्र मुद्दों के साथ एक बार फिर लेफ्ट सरकार की नीतियों और अनुच्छेद-370 हटाने के नाम पर एबीवीपी को चुनौती दे रहा है। खास बात यह है कि आइसा, एआईएसफ, एसएफआई, डीएसएफ एक ही बैनर लेफ्ट यूनिटी पर चुनाव लड़ेंगे। इसकी एबीवीपी से सीधी टक्कर होगी।
जेएनयू कैंपस में छात्रसंघ चुनाव की तैयारियों के बीच 19 अगस्त को आखिरी स्कूल जनरल बॉडी बैठक (स्कूल जीबीएम) स्कूल ऑफ लैंग्वेज व स्कूल ऑफ साइंसेज में होगी। यह बैठक इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि स्कूल ऑफ लैंग्वेज में वामपंथी विचारधारा से प्रभावित मतदाता हैं और स्कूल ऑफ साइंसेज में राइट विंग को पसंद करने वाले।
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पिछली दो स्कूल जीबीएम में आइसा, एसएफआई, आईआईएसएफ आदि वामपंथी छात्र संगठन एक-दूसरे की कमियां गिनाने से अधिक एबीवीपी पर कैंपस का माहौल खराब करने का आरोप लगाते रहे हैं। छात्रसंघ चुनाव की लड़ाई लेफ्ट बनाम राइट के बीच है। विद्यार्थी मौजूदा छात्रसंघ से हॉस्टल, स्कॉलरशिप व फेलोशिप समय से न मिलने, कुलपति के शिकायतों का समाधान न करने, लाइब्रेरी आदि के मुद्दे पर हिसाब मांग रहे हैं।
वामपंथी छात्र संगठनों को चिंता है कि लेफ्ट एक बैनर पर छात्रसंघ चुनाव लड़ता है तो जीत मिलेगी, नहीं तो मोदी लहर में लाल दुर्ग ढह सकता है। इसी के कारण छात्र संगठनों के बड़े नेता कैंपस की बजाय बाहर बैठकों में आपसी रणनीति बनाने में लगे हैं।
प्रत्याशियों का चयन होना बाकी
जेएनयू छात्रसंघ चुनाव में एबीवीपी को बाहर रखने के लिए आइसा, एआईएसफ, एसएफआई, डीएसएफ एक बैनर लेफ्ट यूनिटी पर चुनाव लड़ेंगे। हमारा मकसद एबीवीपी को चुनाव से बाहर करना है, ताकि कैंपस का माहौल खराब न हो। चुनाव में किस पद पर कौन से छात्र संगठन का प्रत्याशी उतारा जाएगा, इस पर अभी अंतिम निर्णय होना बाकी है।
- वलीउल्ला कादरी, राष्ट्रीय अध्यक्ष, एआईएसएफ
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छात्रसंघ ने नहीं किया कोई काम, लेफ्ट को देना होगा जवाब
छात्रसंघ चुनाव जीतने के लिए सभी वामपंथी छात्र संगठन एक हो जाते हैं और कैंपस के मुद्दों पर एक-दूसरे का विरोध करते हैं। वामपंथी छात्र संगठन सालों से विद्यार्थियों को बेवकूफ बना रहे हैं। ये छात्रसंघ चुनाव एक बैनर से लड़ते हैं, लेकिन चुनावी वायदों पर चुपचाप रहते हैं। विश्वविद्यालय में सालों से हॉस्टल की दिक्कत, कैंपस प्लेसमेंट सेल का ढंग से काम न करना आदि मुख्य मुद्दे हैं। काम नहीं करने पर छात्रसंघ को जवाब देना होगा।
- दुर्गेश, अध्यक्ष, जेएनयू एबीवीपी इकाई