जवाहर लाल यूनिवर्सिटी (जेएनयू) की एक बीए तृतीय वर्ष की छात्रा ने जेएनयू प्रशासन पर एक आरोप लगाया है, कि उसका नाम एक ऐसी घटना में घसीटा गया है जिसमें वह शामिल नहीं थी।
छात्रा का नाम वात्या रैना है, बताया जा रहा है कि इनपर 15 मार्च को एक प्रोफेसर के खिलाफ आयोजित घेराव और हिंसा में शामिल होने का आरोप लगा है। इसके लिए 4 अप्रैल को उन्हें जेएनयू प्रोक्टर ऑफिस से एक नोटिस भी मिला है।
छात्रा ने दावा है कि घेराव वाले दिन वह जेएनयू कैंपस में नहीं थी। उस दिन एक थिएटर कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए वह ट्रेन से कोलकाता जा रही थी।
टाइम्स ऑफ इंडिया की एक खबर में कहा गया है कि रैना ने अपनी गैर-मौजूदगी साबित करने के लिए रेलवे टिकट भी पेश किया है लेकिन प्रोक्टर की एक पड़ताल में उन्हें दोषी ठहराते हुए 10 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया है। छात्रा ने अपनी सफाई में कहा है कि वो जुर्माना नहीं चुका सकतीं क्योंकि वह खुद ट्यूशन पढ़ाकर बड़ी मुश्किल से अपना खर्चा उठाती है।
आपको बता दें कि प्रोफेसर के घेराव की घटना 15 मार्च की है जब इटैलियन एंड अमेरिकन स्टडीज स्कूल ऑफ लैंग्वेज के सामने छात्रों के एक समूह ने कई केंद्रों के अध्यक्ष और डीन को हटाए जाने के खिलाफ मार्च निकाला था।
जेएनयू प्रशासन की शिकायत में कहा गया था कि छात्रों ने प्रोफेसर पर हमला किया और आधे घंटे तक उन्हें घेर कर रखा था। कुछ छात्रों ने प्रोफेसर के खिलाफ गाली-गलौज भी किया था। प्रोफेसर ने अपने आरोप में 11 छात्राओं का नाम लिया था, जिसमें रैना का भी नाम शामिल था।
रैना का कहना है कि घटना वाले दिन 2 बजे रेलवे स्टेशन निकल गई थीं क्योंकि उन्हें शाम साढ़े चार बजे दिल्ली-सियालदह राजधानी एक्सप्रेस लेनी थी। उन्हें कोलकाता में एक थिएटर प्रोग्राम में भाग लेना था।