नवंबर में हो सकते है छात्रसंघ चुनाव, दशहरा बवाल मामले में लेफ्ट-एबीवीपी एक-दूसरे पर लगा रहे आरोप
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) छात्र संघ चुनाव से पहले छात्र संगठन सियासी जमीन को मजबूत करने में जुट गए है। दशहरा के दिन जेएनयू परिसर में हुए बवाल को लेकर लेफ्ट और एबीवीपी का एक-दूसरे पर आरोप लगाने का दौर जारी है।
जेएनयू छात्र संघ की उपाध्यक्ष मनीषा ने आरोप लगाते हुए कहा कि जब भी चुनाव नजदीक आते है। एबीवीपी की ओर से ऐसी घटनाओं को अंजाम दिया जाता है। जेएनयू में दशहरा और दुर्गा प्रतिमा विसर्जन की परंपरा पहले से चली आ रही है। मगर, जानबूझकर एबीवीपी ने प्रतिमा विसर्जन की घटना को धार्मिक रंग दिया। जेएनयू के पूर्व छात्रों को रावण के अलग-अलग चेहरों में शामिल किया जबकि उमर खालिद और शरजील इमाम को लेकर कोर्ट की तरफ से कोई फैसला नहीं आया है। पूरा मामला अंडर ट्रायल है। ऐसे में पूर्व छात्रों के पुतले जलाने कहां तक ठीक है। उसी के खिलाफ विरोध दर्ज कराने के लिए परिसर के साबरमती टी प्वाइंट पर एकत्रित होने जा रहे थे। इस बीच यह बवाल हो गया। हमारे ऊपर चप्पल फेंकी गई और आंखों में रंग डाला गया। इस पूरे मामले को दुर्गा प्रतिमा विसर्जन से जोड़ा गया। इस घटना की शिकायत पुलिस और प्रशासन से करेंगे। यह हिंसा एबीवीपी ने की है।
वहीं, एबीवीपी से जेएनयू छात्र संघ के संयुक्त सचिव वैभव मीणा ने कहा कि लेफ्ट छात्र संगठनों की चुनावी जमीन खिसक चुकी है उसी को बचाने के लिए जानबूझकर यह विवाद किया। शोभा यात्रा हर साल निकलती है। पिछले 25 साल से यह परंपरा बरकरार है। लेफ्ट छात्र संगठनों ने कैंपस के वातावरण को खराब किया। वामपंथियों ने दुर्गा पूजा विसर्जन यात्रा पर पत्थरबाजी की और चप्पल दिखाई। अलग-अलग यूनिवर्सिटी छात्र चुनाव में लेफ्ट छात्र संगठनों की हार की यह बौखलाहट थी। इस घटना को लेकर पुलिस और प्रशासन को शिकायत देंगे।
जेएनयू में नवंबर महीने के पहले हफ्ते में छात्र संघ चुनाव हो सकते है। चुनाव समिति संयोजक का चयन करने और यूनिवर्सिटी जनरल बॉडी मीटिंग बुलाने के संबंध में जेएनयू डीन छात्र कार्यालय सर्कुलर जारी कर पहले ही दिशा-निर्देश दे चुका है। जेएनयू में पीएचडी सत्र के शुरू होने के छह से आठ हफ्ते में चुनाव के आयोजन का प्रावधान है। 12 सितंबर से पीएचडी का नया सत्र शुरू हो चुका है।