दिल्ली पुलिस ने इन आरोपियों के अलावा 36 लोगों को आरोप पत्र में कॉलम नंबर 12 (यानी संदिग्ध) में रखा है यानी इन लोगों की गिरफ्तारी लायक साक्ष्य पुलिस को जांच में नहीं मिले। इनमें जेएनयू छात्रसंघ की पूर्व उपाध्यक्ष शेहला राशिद, सीपीआई नेता डी राजा की बेटी अपराजिता, रामा नागा, आशुतोष कुमार, ईशान व अंबेडकर विश्वविद्यालय की एसोसिएट प्रोफेसर बानोज्योत्सना लाहिरी को रखा गया है।
थाना वसंत कुंज पुलिस ने 11 फरवरी 2016 को भाजपा सांसद महेश गिरी व अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) की शिकायत पर देशद्रोह व आपराधिक साजिश की धाराओं में अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था।
केस की गंभीरता के मद्देनजर पुलिस आयुक्त ने जांच स्पेशल सेल को सौंप दी थी। शिकायतकर्ताओं का कहना था कि यह कार्यक्रम पूरी तरह से अवैध था। इसके लिए अनुमति नहीं ली गई थी। पुलिस के मुताबिक कन्हैया ने वहां मौजूद भीड़ को देश विरोधी नारे लगाने के लिए उकसाया था।
पुलिस का यह आरोप पत्र करीब 12 सौ पन्नों का है जिसका मुख्य भाग करीब 50 पन्नों का है। इसमें 10 वीडियो फुटेज, मोबाइल वीडियो फुटेज व दस्तावेजी साक्ष्य शामिल हैं। पुलिस ने कार्यक्रम के पोस्टरों को साक्ष्य के तौर पर पेश किया है। पुलिस ने 90 से ज्यादा लोंगों को गवाह बनाया है। इनमें छात्रों व सुरक्षाकर्मियों के बयान शामिल हैं।
इनके खिलाफ दायर हुई चार्जशीट
इस मामले में कन्हैया, उमर खालिद व अनिर्बन भट्टाचार्य को गिरफ्तार गया था और उन्हें हाईकोर्ट से जमानत मिली थी। इनके अलावा आरोप पत्र में सात कश्मीरी छात्रों मुजीब हुसैन, मुनीब हुसैन, आकिब हुसैन, रईस रसूल, बशारत अली, उमर गुल, खालिद बशीर भट्ट को भी नामजद किया गया है। इन आरोपियों को गिरफ्तार नही किया गया था।
पुलिस ने ये धाराएं लगाईं
स्पेशल सेल ने आरोप पत्र में आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 124, 323, 143, 147, 149 व 120बी के तहत देशद्रोह, मारपीट, फर्जी दस्तावेज इस्तेमाल करना, अवैध भीड़ जमा करना, अवैध भीड़ का हिस्सा बनना, दंगा करना तथा आपराधिक साजिश करने की धारायें लगाई हैं। पुलिस ने आरोपपत्र में तर्क रखा हे कि इन सभी आरोपियों के खिलाफ उक्त धाराओं में मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त साक्ष्य है। ऐसे में सभी पर मुकदमा चलाया जाए।