यौन शोषण मामले में जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के छात्रसंघ अध्यक्ष अकबर चौधरी, संयुक्त सचिव सरफराज हामिद और आइसा सदस्य को जीएस कैश कमेटी ने मंगलवार को फिर एक नोटिस थमाया।
नोटिस में इनसे पूछा गया है कि कैंपस में पंफलेट बांटने और मीडिया में बयान देने पर उनका क्या कहना है।
विश्वविद्यालय में पीड़िता की शिकायत पर जांच को बेहद गोपनीय रखा जाता है और उसी जांच रिपोर्ट के आधार पर आरोपी छात्र या कर्मी के भविष्य पर जेएनयू प्रबंधन फैसला लेता है। कमेटी सर्वोच्च न्यायालय के विशाखा गाइडलाइन के तहत गठित की गई है।
चुनावी तैयारियों के बीच गरमाया माहौल
आइसा सदस्यों को कमेटी का नोटिस मिलते ही उन्होंने ज्यादातर पोस्टरों को कैंपस से हटा दिए हैं, जबकि पोस्टर के नीचे साफ लिखा था कि पांच अगस्त से पहले इसे न हटाया जाए।
बता दें कि जेएनयू में नया सत्र शुरू हो रहा है और छात्रसंघ चुनावों की तैयारियां भी जोरों पर हैं। इसी बीच छात्रसंघ अध्यक्ष और संयुक्त सचिव की शिकायत जीएस कैश में जाने से कैंपस में राजनीतिक माहौल गरमा गया है।
गौरतलब है कि कमेटी के समक्ष 24 जुलाई को एमए की छात्रा ने शिकायत दर्ज करवाई थी। मामले का खुलासा 27 जुलाई को हुआ, जब उक्त दोनों छात्रों को कमेटी का नोटिस मिला, जिसमें उन्हें पक्ष रखने का निर्देश दिया गया। इस नोटिस के आधार पर 28 जुलाई को दोनों छात्रों ने अपना पक्ष साफ कर दिया है।
एबीवीपी आज खोलेगी मोर्चा
एबीवीपी बुधवार दोपहर 2:30 बजे एडमिनिस्ट्रेशन ब्लॉक के सामने विरोध-प्रदर्शन करेगी। एबीवीपी सदस्य संदीप सिंह ने कहा कि जीएस कैश कमेटी के समक्ष ऐसी शिकायत आती है कि तो तुरंत प्रभाव से आरोपी छात्र या कर्मी को कैंपस से बाहर कर दिया जाता है, ताकि वह जांच को प्रभावित न कर सके।
छात्रा ने आरोप छात्रसंघ अध्यक्ष और संयुक्त सचिव पर लगाए हैं, जोकि प्रभावशाली पद हैं। इसके बाद भी जेएनयू प्रबंधन मूकदर्शक बना हुआ है। संदीप ने आइसा पर पीड़िता को शिकायत वापस लेने के लिए दबाव बनाने का भी आरोप लगाया।
जेएनयू के कुलपति प्रो. एसके सोपोरीने कहा कि ऐसे मामलों की जांच जीएस कैश कमेटी करती है। चाहे छात्रा हो या महिला प्रोफेसर या फिर कोई कर्मी। जेएनयू प्रबंधन कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद ही कार्रवाई कर सकता है। अगर कमेटी हमें सुझाव देती है, तब कुछ एक्शन ले सकते हैं, उससे पहले नहीं।