एबीवीपी के प्रवक्ता ने आगे कहा, पूरा देश दो दिन बाद गणतंत्र दिवस मनाने जा रहा है, भारत को जी20 की अध्यक्षता मिली है। भारत में जब इतनी सकारात्मक बातें हो रही हैं तो नकारात्मकता फैलाने वाले वामपंथी संगठन शांत कैसे रह सकते हैं?
देश की राजधानी दिल्ली के प्रतिष्ठित और चर्चित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय यानी जेएनयू (JNU) एक बार फिर विवादों में हैं। हालांकि, विवाद इस बार छात्रों के आपसी टकराव का नहीं बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आधारित एक विवादित डॉक्यूमेंट्री के प्रदर्शन से जुड़ा है। पीएम मोदी पर बनी BBC की विवादित डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग पर जेएनयू परिसर में जमकर बवाल और हंगामे की खबर सामने आ रही है। इस दौरान छात्रों के गुटों की ओर से पथराव होने के आरोप भी लगाए गए। हालांकि, पुलिस की ओर से पथराव की घटना की पुष्टि नहीं की गई।
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पुलिस का कहना है कि उसने इस मामले में कोई एफआईआर दर्ज नहीं की है। शिकायत के आधार पर ही जांच चल रही है। इस बीच भाजपा की छात्र इकाई एबीवीपी ने बयान जारी किया है। अपने बयान में एबीवीपी ने कहा है जेएनयू का वामपंथ उपनिवेशवादी ब्रिटिशर्स के सपनों को साकार करना चाहता है।
एबीवीपी के प्रवक्ता ने आगे कहा, पूरा देश दो दिन बाद गणतंत्र दिवस मनाने जा रहा है, भारत को जी20 की अध्यक्षता मिली है। भारत में जब इतनी सकारात्मक बातें हो रही हैं तो नकारात्मकता फैलाने वाले वामपंथी संगठन शांत कैसे रह सकते हैं?
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ऐसे में ये देश में उपनिवेशवादी ब्रिटिसर्स के एजेंडे को साकार करने के लिए चालें चल रहे हैं। जब हम भारत के भूले हुए नायकों को इस आजादी के अमृत महोत्सव के मौके पर याद कर रहें हैं, जब हमारा देश बुलंदियों की नई सीढ़ी को छू रहा है तब इन देशद्रोहियों को इस बात से दिक्कत आ रहीं हैं कि कैसे हमारे देश में इस तरह की सकारात्मक चीजें इतनी आसानी से हो रहा है।
जेएनयू में पिछले कई वर्षों में यही देखा जा रहा है कि कैसे यहां के मुट्ठीभर वामपन्थी छात्र एवं प्रोफेसर ने फर्जी–आधुनिकतावादी मार्क्सवादी-देशद्रोही एजेंडा' से देश को विभाजित करना जारी रखा है और जेएनयू के प्रतिभावान छात्रों को समाज में बदनाम कर रहे हैं।