मोटरसाइकिल से गिरने के बाद सबसे पीछे बैठे संतोष के सिर और मुंह पर भी चोट लगी थी। उसका जबड़ा टूट गया था और सिर पर अंदरूनी चोटें थीं।
जेएनयू की छात्रा स्वाति के मुताबिक, सफदरजंग अस्पताल पहुंचने के बाद संतोष को एक घंटे तक आईसीयू में बेड नहीं मिला। अगर जगह मिलती तो समय से इलाज शुरू हो जाता और शायद उसकी जान बचाई जा सकती थी।
वहीं, अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि तुरंत इलाज शुरू हो गया था। उधर, छात्रसंघ अध्यक्ष अकबर चौधरी का आरोप है कि रवि गुप्ता को पहले सफदरजंग और उसके बाद एम्स ट्रामा सेंटर भेजा गया। अगर पहले ही एम्स भेज दिया जाता तो शायद रवि की भी जान बच सकती थी।
पिता को शव पहुंचने तक नहीं दी जानकारी
रवि गुप्ता अपनी स्कॉलरशिप से अपने साथ परिवार के सपनों को पूरा करने में लगा हुआ था। दोस्तों ने हादसे की सूचना रवि शंकर और संतोष के घर में भी दे दी थी, लेकिन रवि गुप्ता के घर में नहीं बताया।
रवि की बहन और भाई का नंबर तलाशने के बाद दोस्तों ने बताया कि घर में मत बताना, क्योंकि रवि के पिता दिल के मरीज हैं और बेटे की मौत का गम सहन नहीं कर पाएंगे। दोपहर तक तीनों के परिजन दिल्ली पहुंच गए थे। सफदरजंग अस्पताल में पोस्टमार्टम के दौरान सभी का रो-रोकर बुरा हाल था।