जेएनयू के पूर्वी द्वार पर रफ्तार के कारण तीन छात्रों की मौत की खबर सुनते ही लाल दुर्ग गमगीन हो गया। कैंपस में गुड फ्राइडे की छुट्टी होने के चलते यूं तो छुट्टी का माहौल था, लेकिन हर ढाबे से लेकर हॉस्टल तक छात्रों में रवि शंकर, रवि और संतोष के जाने का मलाल था। हर किसी के चेहरे पर मेधावी छात्रों की मौत का दर्द था।
कैंपस में दिन-रात एक होते हैं। दिन में कक्षाओं में चहल-पहल तो रात ढाबों में गुलजार रहती है। जेएनयू के इसी कल्चर के चलते बृहस्पतिवार रात को जश्न मनाया गया जिसे रफ्तार के कहर ने मातम में बदल दिया। कई छात्र अस्पताल में दुखी परिवारों का हौसला बढ़ाने भी पहुंचे।
छात्र वसीम, अकरम, अकबर के मुताबिक, हादसे ने कैंपस को हिलाकर रख दिया है। रफ्तार के कारण तीन दोस्त एक साथ अलविदा कह गए। तीनों खास दोस्त थे, लेकिन अलग-अलग हॉस्टल में थे। रवि शंकर चंद्रभागा हॉस्टल में रूम नंबर 235 में रहता था। जबकि रवि गुप्ता ताप्ति हॉस्टल में 286 और संतोष कावेरी के रूम नंबर 41 में रहता था।
नहीं लिया सबक
कुलपति निवास से मुख्य कैंपस की ओर जाने वाली पूर्वी द्वार सड़क पर यह पहला हादसा नहीं है। इसी जगह लगभग तीन साल पहले भी रफ्तार में बाइक का संतुलन बिगड़ने पर भीषण दुर्घटना हो चुकी है। लेकिन, विश्वविद्यालय प्रबंधन समेत छात्रसंघ ने कोई सबक नहीं लिया और कहीं भी ब्लाइंड कट पर ब्रेकर नहीं बनाए।
जेएनयू छात्रसंघ अकबर चौधरी ने कहा कि कैंपस में दर्दनाक हादसे में तीन छात्रों की मौत कई सवाल खड़े कर गई है। कैंपस का एरिया काफी बढ़ा होने से वाहन की जरूरत पड़ती है, लेकिन उसी के चलते हुए दर्दनाक हादसे से अब सबक लेना होगा। कैंपस में बढ़ती वाहनों की संख्या और रफ्तार पर लगाम लगाने के लिए विश्वविद्यालय प्रबंधन के साथ बैठक करके योजना बनाई जाएगी, ताकि ऐसा हादसा दुबारा न हो।
प्रबंधन ने शवों को पटना भिजवा दिया
जेएनयू के कुलपति प्रो. एसके सोपोरी का कहना है कि रफ्तार के चलते तीन परिवारों ने ही नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय ने भी हीरे खोए हैं। प्रबंधन हादसे से बेहद आहत है। रफ्तार देखकर सिक्योरिटी ने उन्हें रोका भी था, लेकिन वे नहीं रुके। आगे सिक्योरिटी को फोन भी किया गया, लेकिन उससे पहले ही तेज बाइक पेड़ से जा टकराई।
प्रबंधन ने शवों को हवाई जहाज से पटना भिजवा दिया है। रफ्तार पर लगाम लगाने के लिए छात्रसंघ से मदद मांगी गई है। जागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा।