गुरुग्राम नगर निगम दायरे में शामिल संपत्तियों का एक वर्ष बीत जाने के बाद भी जिओ मैपिंग सर्वे का कार्य अधूरा पड़ा हुआ है। इस कारण निगम में अब भी पहले की तरह ही संपत्तिकर जमा हो रहा है।
ऐसे में नगर निगम में संपत्तिकर में खाली प्लॉट दिखाकर करोड़ों रुपयों के राजस्व का नुकसान पहुंचाया जा रहा है। इसी की रोकथाम के लिए शहरी स्थानीय निकाय विभाग ने शहर में जियो मैपिंग से सर्वे करवाने का आदेश दिए थे। लॉकडाउन के पहले से ही यह कार्य लंबित है।
दरअसल, नगर निगम में बने हुए भवनों को खाली प्लॉट दिखाकर लाखों रुपयों के संपत्तिकर में हेराफेरी की जा रही है। मौके पर भवन का प्रयोग किस कार्य के लिए किया जा रहा है, यह देखने वाला भी कोई नहीं है।
इस घालमेल पर रोक लगाने के लिए जियो मैपिंग डाटा बेस पर सर्वे करवाया जा रहा है। इस समय निगम में करीब साढे़ तीन लाख संपत्तियों का पंजीकरण है। सर्वे के बाद सभी संपत्तियों का डाटा ऑनलाइन हो जाएगा, जिससे अधिकारी संपत्ति मालिक से मिलकर हेराफेरी नहीं कर पाएंगे।
नगर निगम गुरुग्राम में जमा होता है सबसे ज्यादा संपत्तिकर
प्रदेश के सभी निगमों व नगर परिषदों में से नगर निगम गुरुग्राम में सबसे ज्यादा संपत्तिकर जमा होता है। निगम में इस बार भी वार्षिक संपत्तिकर एकत्रित करने के लिए करीब 250 करोड़ रुपये का लक्ष्य रखा गया है। अप्रैल के बाद से अभी तक निगम में इस वर्ष करीब 30 करोड़ रुपये का संपत्तिकर जाम भी हो चुका है।
क्षेत्रिय कराधान अधिकारी देवेंद्र कुमार ने बताया कि लॉकडाडन के कारण अभी जिओ मैपिंग सर्वे का कार्य अधूरा है। एजेंसी की ओर से अगले माह तक सर्वे शुरू होगा।